टारगेट न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट: पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवा एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में अब एक नया और संवेदनशील मोड़ आ गया है। इस सनसनीखेज मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने के बाद, मृतक की पत्नी मनप्रीत कौर ने तिनकोनी धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों और संघर्ष समिति से पति के शव का पोस्टमार्टम कराने की अनुमति मांगी है। परविंदर सिंह झोटा का शव पिछले आठ दिनों से स्थानीय सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ है, जिसे लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। मनप्रीत कौर ने अपने दोनों मासूम बेटों और ससुर भीम सिंह के साथ प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि परिवार आंदोलन की कोर कमेटी और वहां मौजूद जनता की सहमति के बिना कोई भी अंतिम फैसला नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि खालसा और पूरा परिवार स्वतंत्र है, लेकिन इस लड़ाई में जनता का साथ और उनका निर्देश सर्वोपरि है।
घटना की गहराई और प्रमुख पहलू (Deep Breakdown)
- सीबीआई को जांच ट्रांसफर: केंद्र सरकार द्वारा इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की जांच सीबीआई के हवाले किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
- शवगृह में आठ दिनों से शव: परिवार ने मांग की है कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के डॉक्टरों के पैनल द्वारा ही पोस्टमार्टम किया जाए, लेकिन प्रदर्शनकारियों और निहंग सिखों की कड़ी पहरेदारी के कारण अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
- गृह मंत्री से मुलाकात: हाल ही में परिवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे समेत अन्य कड़े कदम शामिल हैं।
- सबूत से छेड़छाड़ की आशंका: परिवार ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी की दुकान को बिना परिवार की मांग के गिरा दिया गया, जिससे अहम सबूत नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।
- सार्वजनिक अपील: मनप्रीत कौर ने स्पष्ट किया कि शव में मौजूद साक्ष्य समय बीतने के साथ नष्ट हो सकते हैं, इसलिए चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर पोस्टमार्टम बेहद जरूरी है, लेकिन वे इसके लिए जनता का आशीर्वाद और अनुमति चाहती हैं।
पृष्ठभूमि और बड़ा परिदृश्य (Background & Context)
यह पूरा मामला 13 अक्टूबर का है, जब एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा पर एक केमिस्ट की दुकान पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री को लेकर तीखी बहस हुई थी और उसी दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी। इस पूरी खौफनाक वारदात को फेसबुक पर लाइव भी किया गया था, जिसके बाद पूरे पंजाब में रोष की लहर दौड़ गई। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से लोग और किसान संगठन तथा निहंग पंथ के लोग झोटा को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आए। ड्रग्स के खिलाफ खुली बगावत करने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने राज्य की कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार और जनता ने न्याय की गुहार लगाते हुए कड़ा संघर्ष शुरू किया, जो अब एक बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। परिवार का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, बल्कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब को नशामुक्त बनाना और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाना है।
प्रभाव और दूरगामी परिणाम (Impact Analysis)
इस हत्याकांड और उसके बाद चल रहे लंबे धरने-प्रदर्शन का असर पंजाब की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा पड़ा है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में युवाओं के बीच ड्रग माफिया के खिलाफ गुस्सा अपने चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में पारदर्शी और त्वरित न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। इसके अलावा, सीबीआई जांच से उम्मीद जगी है कि मामले के असली सरगना और राजनीतिक संरक्षण पाने वाले चेहरे भी बेनकाब होंगे। मनप्रीत कौर द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शनकारियों के सामने अपनी बात रखना और उनकी अनुमति मांगना इस आंदोलन की एकजुटता को और मजबूत करता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ड्रग तस्करों का सामाजिक बहिष्कार करें और इस बुराड़ी के खिलाफ उठने वाली हर आवाज का साथ दें।
हम इस लड़ाई को अकेले नहीं लड़ सकते। मेरे पति का शरीर पिछले आठ दिनों से शवगृह में है और समय के साथ साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। लेकिन हम संघर्ष समिति और आप सभी की सहमति के बिना कोई भी कदम नहीं उठाएंगे। पंजाब हमारे लिए सबसे पहले है। – मनप्रीत कौर, मृतक परविंदर सिंह झोटा की पत्नी
अंतिम निष्कर्ष (Final Takeaway)
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड और उसके बाद का यह घटनाक्रम पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। एक तरफ जहां शोकाकुल परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और विभिन्न संगठनों का समर्थन इस बात का प्रमाण है कि लोग अब ड्रग्स के जहर के खिलाफ चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। सीबीआई जांच के दायरे में आने के बाद अब यह देखना बेहद अहम होगा कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस पेचीदा मामले में कितनी जल्दी और निष्पक्ष तरीके से सच को बाहर लाती है। फिलहाल, परिवार द्वारा पोस्टमार्टम के लिए अनुमति मांगना इस बात का संकेत है कि अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, बशर्ते आंदोलन से जुड़े तमाम पक्ष आपसी सहमति से अगला कदम उठाएं।


















