Home Punjab चंडीगढ़ आवास बोर्ड जीपीए नीति को पुनर्जीवित करने पर कर रहा विचार,...

चंडीगढ़ आवास बोर्ड जीपीए नीति को पुनर्जीवित करने पर कर रहा विचार, संपत्ति हस्तांतरण में मिलेगी राहत

चंडीगढ़ आवास बोर्ड जीपीए नीति को पुनर्जीवित करने पर कर रहा विचार, संपत्ति हस्तांतरण में मिलेगी राहत

द टारगेट न्यूज़:

चंडीगढ़ आवास बोर्ड (CHB) के निदेशक मंडल की आगामी बैठक में अपनी 2016 की सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) और लेनदेन नीति को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो उन हजारों निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने वर्षों पहले जीपीए के माध्यम से संपत्तियां खरीदी थीं, लेकिन कानूनी बाधाओं के चलते उन्हें अपने नाम पर औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं करवा पा रहे थे। बोर्ड ने 2016 में पुराने संपत्ति लेनदेन को नियमित करने के लिए एक नीति शुरू की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले और चंडीगढ़ प्रशासन के निर्देशों के बाद जनवरी 2018 से जीपीए और विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी (SPA) के आधार पर ट्रांसफर के लिए आवेदन लेना बंद कर दिया था। वर्तमान में कई खरीदार संपत्तियों के कब्जे में हैं और पुराने लेनदेन से जुड़े दस्तावेज उनके पास हैं, लेकिन वे औपचारिक स्वामित्व अधिकार सुरक्षित करने में कानूनी अड़चनों का सामना कर रहे हैं। सीचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के अध्यक्ष निर्मल दत्त के अनुसार, यूटी प्रशासन ने 2001 में जीपीए-आधारित स्वामित्व हस्तांतरण को कानूनी रूप से स्वीकार किया था। 2007 के आसपास स्वामित्व के मुद्दों और आवश्यकता-आधारित बदलावों से उत्पन्न उल्लंघनों को अलग किया गया, जिसके बाद जीपीए लेनदेन के माध्यम से लगभग 50 से 60 प्रतिशत निवासियों को स्वामित्व अधिकार मिले और उन्होंने अपने घरों को फ्रीहोल्ड में भी बदलवा लिया। बोर्ड ने वसीयत को भी स्वामित्व हस्तांतरण के एक माध्यम के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया था, जिसमें संपत्ति प्राप्त करने वाले परिवार के सदस्य को ‘legatee’ और बाहरी व्यक्ति को ‘beneficiary’ कहा जाता था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने जीपीए के माध्यम से स्वामित्व के हस्तांतरण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। बोर्ड के इस निर्णय से यह तय होगा कि क्या यह नीति 11 अक्टूबर 2011 से पहले किए गए लेनदेन तक सीमित रहेगी या अन्य पात्र पुराने मामलों को भी कवर करेगी। इसके अलावा, बोर्ड स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 के लाभार्थियों के लिए एकमुश्त ब्याज माफी योजना और किफायती किराया आवास परिसर (ARHC) योजना के तहत आवंटियों और लाइसेंसधारियों के लिए इसी तरह की राहत के प्रस्ताव पर भी विचार करेगा। साथ ही, एआरएचसी योजना के तहत फ्लैटों के लाइसेंस शुल्क के युक्तिकरण से जुड़ा एक अन्य प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

Translate »
error: Content is protected !!