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पूर्व SSP पर FIR! सरकारी फंड से 2.35 लाख की निकासी का आरोप

शिमला। राजवीर दीक्षित 

(FIR against former SSP! Accused of withdrawing ₹2.35 lakh from government funds) हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी फंड में कथित गड़बड़ी और धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस थाना सदर में दर्ज मामले के अनुसार, एक कांस्टेबल की शिकायत और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है। आरोप है कि जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों में 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी हुई, जबकि कांस्टेबल के स्वीकृत बिलों की राशि का भुगतान नहीं किया गया।

जेब से खर्च किए 1.87 लाख, भुगतान अटका

शिकायतकर्ता पुलिस लाइन कैथू में तैनात कांस्टेबल है। आरोप है कि वर्ष 2024 और 2025 में सरकारी कामकाज के लिए सामान और जरूरी व्यवस्थाएं जुटाने की जिम्मेदारी उसे दी गई थी। उसे भरोसा दिलाया गया था कि पहले अपनी जेब से खर्च करने के बाद बिलों का भुगतान कर दिया जाएगा।

कांस्टेबल के मुताबिक, उसने इस काम पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए और संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए। जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए मंजूरी भी मिल गई, लेकिन आरोप है कि स्वीकृत राशि उसके खाते में नहीं पहुंची।

वाउचर पर हस्ताक्षर, फिर भी नहीं मिला पैसा

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी ने उसे बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उसे बताया गया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए ऐसा करना जरूरी है और स्वीकृत राशि जल्द मिल जाएगी।

जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कांस्टेबल ने अकाउंट ब्रांच से भुगतान की जानकारी ली। उसके अनुसार, वहां पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसके बैंक खाते में जमा नहीं हुई। इसके बाद उसे अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से पैसे जुटाने पड़े।

फंड से 2.35 लाख रुपये की निकासी की जांच

पुलिस के अनुसार, शिकायत के बाद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी के तथ्य सामने आए। आरोप है कि इस राशि के इस्तेमाल से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, जिससे फंड में कमी हो गई।

रिकॉर्ड के मुताबिक, पूर्व एसएसपी का कार्मिक विभाग में तबादला होने के समय फंड की कमी पूरी करने के लिए शिकायतकर्ता के स्वीकृत बिलों की राशि दूसरे खाते में स्थानांतरित की गई। आरोप है कि कांस्टेबल को भुगतान करने के बजाय रकम संबंधित फंड के खाते में जमा करवा दी गई।

BNS की पांच धाराओं में केस दर्ज

पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्टूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 316(5), 314, 318, 336 और 340 लगाई गई हैं। ये धाराएं आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के बेईमानी से इस्तेमाल, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने या इस्तेमाल करने जैसे आरोपों से संबंधित हैं।

पूर्व एसएसपी का पक्ष नहीं मिल सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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