द टारगेट वेब डेस्क
(‘Punjab & Haryana High Court Lok Adalat Awards ₹42 Lakh Additional Compensation to Late Army Captain’s Parents “) करीब 19 साल पहले सड़क हादसे में जान गंवाने वाली भारतीय सेना की 23 वर्षीय कैप्टन परमिला के माता-पिता को आखिरकार न्याय मिल गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डेली लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा पहले दिए गए 5.77 लाख रुपये के मुआवजे के अलावा 42 लाख रुपये अतिरिक्त देने पर समझौते को मंजूरी दे दी है।
यह मामला कैप्टन परमिला के माता-पिता विजय कुमार टोप्पो और मैरी सी. टोप्पो द्वारा दायर अपील से जुड़ा था। उन्होंने MACT के वर्ष 2007 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें केवल 5,77,400 रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया गया था।

लोक अदालत की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे.सी. वर्मा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार शामिल थे, ने बताया कि कैप्टन परमिला 24 मई 2007 को सड़क दुर्घटना का शिकार हुई थीं। उस समय उनकी उम्र मात्र 23 वर्ष थी और वे भारतीय सेना में सेवाएं दे रही थीं।
दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद मामला आपसी सहमति से सुलझ गया। समझौते के अनुसार, बीमा कंपनी अब पहले दिए गए मुआवजे के अतिरिक्त 42 लाख रुपये का भुगतान करेगी। यह राशि कैप्टन परमिला के माता-पिता को बराबर हिस्सों में दी जाएगी।
लोक अदालत ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि 14 सितंबर 2026 तक 42 लाख रुपये का क्रॉस्ड चेक हाईकोर्ट लोक अदालत कार्यालय में जमा कराया जाए। यदि तय समय तक भुगतान नहीं किया गया, तो इस राशि पर आदेश की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यह फैसला न केवल एक परिवार के लंबे कानूनी संघर्ष का अंत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वर्षों बाद भी न्याय की उम्मीद कायम रहती है। यह निर्णय सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में पीड़ित परिवारों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।



















