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सेब बागवानों की बढ़ती चिंताएं, 6 हजार करोड़ की इंडस्ट्री पर मंडराया खतरा!

शिमला। राजवीर दीक्षित
(Himachal Apple Industry Faces Drought Threat)हिमाचल प्रदेश का सेब उद्योग इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। लगातार तीन महीनों से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण राज्य में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिससे करीब 6 हजार करोड़ रुपये के सेब कारोबार पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। मौसम की यह बेरुखी सीधे तौर पर सेब की पैदावार, गुणवत्ता और बागवानों की आजीविका को प्रभावित कर रही है। यदि आने वाले दिनों में मौसम ने करवट नहीं बदली, तो उत्पादन में भारी गिरावट तय मानी जा रही है।

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नमी की भारी कमी के चलते सेब के बागानों में रूट कैंकर, वूली एफिड, रिंग वर्म और स्केल जैसी खतरनाक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। शिमला जिले के रामपुर, चौपाल, ठियोग, रोहड़ू और कुमारसैन जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां जड़ों में दरारें पड़ने और फंगस के बढ़ते हमलों से बागानों को भारी नुकसान हो रहा है।

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सूखे के कारण बागवानों ने नए पौधे लगाने का काम फिलहाल रोक दिया है। साथ ही बागानों में पौधों के चारों ओर ‘तौलिये’ बनाने और खाद डालने की प्रक्रिया भी ठप पड़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में फास्फोरस और पोटाश खाद देना बेहद जरूरी होता है, लेकिन जमीन में नमी न होने से यह संभव नहीं हो पा रहा।

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इस संकट का असर इससे जुड़े अन्य कारोबारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दवाइयों और खाद की बिक्री में करीब 75 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले जनवरी में स्प्रे ऑयल और खाद की भारी मांग रहती थी, वहीं इस बार बाजार लगभग सूना पड़ा है।
सबसे बड़ी चिंता ‘चिलिंग आवर्स’ को लेकर है। विशेषज्ञों के मुताबिक सेब की अच्छी फसल के लिए सर्दियों में 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे 1000 से 1800 घंटे का तापमान जरूरी होता है। बारिश और बर्फबारी न होने से यह चक्र पूरा नहीं हो पा रहा। फिलहाल हिमाचल के सेब बागवान प्रकृति की मेहरबानी और बारिश के इंतजार में हैं।

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