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भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू! निर्यात को राहत, भारतीयों के लिए वीजा के नए रास्ते

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

 

(India-New Zealand FTA comes into effect! Relief for exports, new visa avenues for Indians) भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मंगलवार, 20 अक्टूबर से लागू हो गया है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, जबकि न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों को भारतीय बाजार में रियायती शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इसके साथ ही योग्य भारतीय पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में अस्थायी रोजगार वीजा के नए रास्ते भी खुलेंगे।

समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात की सभी टैरिफ श्रेणियों पर सीमा शुल्क समाप्त करेगा। वहीं, भारत की ओर से न्यूजीलैंड के उत्पादों पर शुल्क में कटौती अलग-अलग वस्तुओं के हिसाब से होगी। कुछ उत्पादों को तत्काल राहत मिलेगी, जबकि अन्य पर शुल्क में कटौती चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।

भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा

FTA लागू होने के बाद भारतीय सामान को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों को वहां के बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, भारत ने न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों को रियायती शुल्क देने का फैसला किया है। इनमें भेड़ का मांस, ऊन और लकड़ी से बनी कुछ वस्तुओं को शुल्क-मुक्त प्रवेश शामिल है। अन्य उत्पादों पर तय समय-सारिणी के अनुसार शुल्क घटाया जाएगा।

सेब, कीवी और शहद पर क्या बदलेगा?

समझौते में न्यूजीलैंड के कुछ कृषि उत्पादों के लिए सीमित मात्रा में रियायती आयात की व्यवस्था की गई है।

  • कीवी फल: पहले वर्ष में न्यूनतम 1.80 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम मूल्य वाले कीवी फल के लिए 6,250 टन का शून्य-शुल्क कोटा तय किया गया है।

  • सेब: दूसरे वर्ष से 35,000 टन सेब 25 प्रतिशत शुल्क पर आयात किए जा सकेंगे। वर्तमान 50 प्रतिशत शुल्क के मुकाबले यह कटौती होगी।

  • मनुका शहद: प्रमाणित मनुका शहद के लिए कोटा आधारित रियायती शुल्क की व्यवस्था की गई है। 2026 के शेष समय के लिए घोषित कोटा 40 टन है।

शराब पर भी कीमत के आधार पर अलग-अलग शुल्क दरें लागू होंगी। पहले वर्ष में प्रति 750 मिलीलीटर बोतल के CIF मूल्य के अनुसार शुल्क 70 से 150 प्रतिशत तक रहेगा।

डेयरी और चीनी पर भारत का सुरक्षा कवच

समझौते में भारत ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, चीनी, खाद्य तेल और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं। भेड़ के मांस को छोड़कर अन्य पशु मांस भी इन रियायतों से बाहर रखा गया है।

इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों और संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की रक्षा करना है।

भारतीयों के लिए 5,000 अस्थायी वर्क वीजा

FTA के तहत 20 अक्टूबर से योग्य भारतीय नागरिकों के लिए Temporary Employment Entry वीजा के दो रास्ते उपलब्ध होंगे। इनके तहत एक समय में अधिकतम 5,000 वीजा धारक न्यूजीलैंड में रह सकेंगे। वीजा की वैधता तीन साल होगी और इससे सीधे स्थायी निवास का अधिकार नहीं मिलेगा।

आवेदकों को न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन नियमों के तहत मान्य नियोक्ता से नौकरी का प्रस्ताव हासिल करना होगा। इसके अलावा शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी भाषा, स्वास्थ्य और चरित्र संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

नवंबर से पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा में बदलाव

समझौते के तहत 16 नवंबर से न्यूजीलैंड से पीएचडी करने वाले पात्र भारतीय स्नातकों के लिए चार साल तक के पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा का विकल्प उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके अलावा, 18 से 30 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिकों के लिए वर्किंग हॉलिडे कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है। इसके तहत हर साल अधिकतम 1,000 भारतीयों को 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहने का अवसर मिल सकता है। कार्यक्रम समझौते के लागू होने के दो साल के भीतर शुरू किए जाने का लक्ष्य है।

15 साल में 20 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य

भारत और न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को संभव बनाने का लक्ष्य रखा है। दोनों देश 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं।

यह समझौता व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबारियों को कितनी जल्दी लाभ मिलता है और वीजा व निवेश से जुड़ी व्यवस्थाएं किस गति से लागू होती हैं।

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