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जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में बड़ा सुधार, अब मात्र 17 दिनों में मिलेगा क्लेम और पंजीकरण होगा पूरी तरह ऑटोमेटेड

जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में बड़ा सुधार, अब मात्र 17 दिनों में मिलेगा क्लेम और पंजीकरण होगा पूरी तरह ऑटोमेटेड

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: देश के कारोबारी जगत और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद देश में व्यापार करने की सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को और अधिक बढ़ावा देने के लिए अपनी पुरानी और जटिल प्रक्रियाओं में व्यापक और दूरगामी बदलाव करने की तैयारी कर रही है। नई प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को बेहद तेज करते हुए इसे महज 17 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, करदाताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण (जीएसटी रजिस्ट्रेशन) की पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े और उनका कीमती समय बच सके।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को चुस्त-दुरस्त बनाते हुए इसे अब लगभग 17 दिनों के भीतर प्रोसेस करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
  • व्यापारियों के लिए जीएसटी नंबर के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमेटेड) किया जाएगा।
  • कई राज्यों में कारोबार करने वाले छोटे व्यवसायों को बार-बार अलग-अलग पंजीकरण कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
  • जीएसटी पंजीकरण रद्द करने के दौरान होने वाली भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
  • व्यवसाय से जुड़े विभिन्न खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

पिछले कुछ महीनों से देश भर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों और उद्योगपतियों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि टैक्स रिफंड मिलने में लगने वाले लंबे समय के कारण उनका कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) फंस जाता है। इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए जीएसटी परिषद के शीर्ष अधिकारियों और कर विशेषज्ञों के बीच कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में यह निष्कर्ष निकला कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में टैक्स रिफंड और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त कर पूरी तरह तकनीक पर आधारित बनाया जाना चाहिए। शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार, रिफंड के दावों की जांच के लिए अत्याधुनिक एल्गोरिदम और ऑटोमेटेड सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे पात्र व्यापारियों के बैंक खातों में निर्धारित समय सीमा के भीतर सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा सकें। इसके अलावा, बहु-राज्यीय छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी पीड़ा को समझते हुए एक ही पैन के आधार पर विभिन्न राज्यों में अनुपालन को आसान बनाने के नए नियम तैयार किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

सरकार के इस संभावित कदम का देश के व्यापारिक समुदाय द्वारा जोरदार स्वागत किया गया है। अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि रिफंड मात्र 17 दिनों में मिलने लगे, तो इससे छोटे कारोबारियों की तरलता (लिक्विडिटी) में भारी सुधार होगा। दूसरी ओर, वित्त मंत्रालय के सूत्रों का यह भी कहना है कि कर चोरी रोकने के साथ-साथ ईमानदार करदाताओं को परेशान न होना पड़े, यही इस नई नीति का मूल मंत्र है। पंजीकरण रद्द करने के मामलों में फिजिकल वेरिफिकेशन को खत्म करने से स्थानीय कर अधिकारियों और व्यापारियों के बीच अनावश्यक टकराव भी कम होगा।

कारोबारियों का कहना है कि रिफंड में देरी और कागजी कार्रवाई के झंझट व्यापार की गति को धीमा कर देते हैं। नई स्वचालित प्रणालियों से पारदर्शिता आएगी और कर अनुपालन करना बहुत आसान हो जाएगा।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में इन सभी सुधार प्रस्तावों को आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है। परिषद की मुहर लगते ही विभिन्न राज्यों के वाणिज्यिक कर विभागों को इन नए दिशा-निर्देशों को लागू करने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। तकनीकी बदलावों को जमीन पर उतारने के लिए जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के पोर्टल में आवश्यक सॉफ्टवेयर अपडेट भी जल्द ही किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में ये सभी सुधार देश के करोड़ों करदाताओं के लिए धरातल पर उतर जाएंगे, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापारिक गतिविधियां और अधिक रफ्तार पकड़ेंगी।

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