चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
जीरकपुर में बिल्डर के खिलाफ अब बड़ा एक्शन हुआ है!
जिस प्रोजेक्ट में घर खरीदने के लिए लाखों रुपये चुकाने के बावजूद खरीदार को कब्जा नहीं मिला, अब उसी प्रोजेक्ट को पूरी तरह अटैच करने के आदेश जारी हो गए हैं। इतना ही नहीं, बकाया रकम की वसूली के लिए रिसीवर नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है। यानी मामला अब सिर्फ फ्लैट का कब्जा दिलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिल्डर की प्रॉपर्टी से रकम वसूलने तक पहुंच चुका है।
चंडीगढ़ स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने सुषमा बिल्डटेक लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ यह सख्त कदम उठाया है। कमीशन ने मोहाली के डिप्टी कमिश्नर-कम-कलेक्टर को सुषमा चंडीगढ़ ग्रांडे का पूरा प्रोजेक्ट अटैच करने और डिक्री की रकम की रिकवरी के लिए रिसीवर नियुक्त करने का आदेश दिया है।
यह कार्रवाई 31 अगस्त 2026 के आदेश के बाद सामने आई। कमीशन ने पाया कि पहले दिए गए आदेश का पालन नहीं हुआ। खास बात यह है कि नोटिस मिलने के बावजूद जजमेंट डेटर्स की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में मौजूद नहीं हुआ। इसके बाद कमीशन ने मामले में उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई आगे बढ़ाई।
मामला मुनिशा शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने अपने वकील अरिहंत गोयल के माध्यम से निष्पादन आवेदन दायर किया था। उन्होंने जीरकपुर के सुषमा चंडीगढ़ ग्रांडे में 1,885 वर्ग फुट की यूनिट बुक की थी। इस प्रॉपर्टी की कुल कीमत करीब 1.01 करोड़ रुपये थी और दंपती ने इसमें से 90 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया था।
लेकिन इसके बावजूद तय समय पर उन्हें घर का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया।
20 सितंबर 2024 को कमीशन ने बड़ा आदेश सुनाया था। इसमें सुषमा बिल्डटेक, मैनेजिंग डायरेक्टर बिंदर पाल मित्तल और निदेशकों प्रदीप कुमार व भारत मित्तल को यूनिट का वास्तविक और भौतिक कब्जा शिकायतकर्ताओं को सौंपने का निर्देश दिया गया था।
कमीशन ने सिर्फ कब्जे का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि जमा रकम पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने को भी कहा। 1 जुलाई 2020 से 20 सितंबर 2024 तक की अवधि के लिए ब्याज और इसके बाद वास्तविक कब्जा मिलने तक 90 लाख रुपये पर ब्याज जारी रखने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 1.50 लाख रुपये मुआवजा तथा मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 50 हजार रुपये देने का आदेश भी था।
अब ताजा कार्रवाई में कमीशन ने डिक्री की रकम को भूमि राजस्व के बकाये की तरह वसूलने का निर्देश दिया है। साथ ही बिल्डर पक्ष को विवादित संपत्ति में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से रोक दिया गया है।
अगर खरीदारों ने बैंक या वित्तीय संस्था से होम लोन लिया है, तो बकाया लोन की सीमा तक ऋणदाता का पहला अधिकार रहेगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी।
देखना होगा कि अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट की अटैचमेंट और रकम की वसूली को लेकर क्या कार्रवाई सामने आती है।


















