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लुधियाना की गिल रोड पर बढ़ता प्रदूषण और जाम: निवासियों ने मिक्स्ड लैंड यूज के खिलाफ खोला मोर्चा

लुधियाना की गिल रोड पर बढ़ता प्रदूषण और जाम: निवासियों ने मिक्स्ड लैंड यूज के खिलाफ खोला मोर्चा

thetargetnews.in ब्यूरो: लुधियाना की घनी आबादी वाली गिल रोड के निवासी अब अपनी सेहत और सुरक्षा को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इलाके में चल रही औद्योगिक इकाइयों के कारण बढ़ते प्रदूषण, भारी वाहनों की आवाजाही और जाम की समस्या से परेशान स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मिक्स्ड लैंड यूज (MLU) के तहत मिलने वाली बार-बार की विस्तार अवधि (एक्सटेंशन) को अब और न बढ़ाया जाए। निवासियों का स्पष्ट कहना है कि इन इकाइयों को अब शहर से बाहर औद्योगिक क्षेत्रों में शिफ्ट करने का समय आ गया है।

समस्या की जड़: क्या है निवासियों का दर्द?

गिल रोड पर पिछले कई वर्षों से रिहायशी इलाकों के बीच छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, शोर और रसायनों का कचरा उनके बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इसके अलावा, कच्चा माल लाने और तैयार माल ले जाने वाले भारी ट्रकों के कारण सड़कें हर समय जाम रहती हैं, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और आपातकालीन एम्बुलेंस को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय निवासी और संघर्ष समिति के सदस्य का कहना है, ‘हमने प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए हैं। मिक्स्ड लैंड यूज के नाम पर बार-बार एक्सटेंशन देना हमारी समस्याओं को नजरअंदाज करने जैसा है। हम चाहते हैं कि सरकार अब इन इकाइयों को तय औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की ठोस नीति लागू करे।’

प्रमुख मांगें और भविष्य की राह

निवासियों ने अपनी मांगों को लेकर स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को चेतावनी दी है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • मिक्स्ड लैंड यूज के तहत दी जाने वाली किसी भी नई विस्तार अवधि को तुरंत रद्द किया जाए।
  • रिहायशी इलाकों में चल रही प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों का सर्वे कर उन्हें बंद किया जाए।
  • औद्योगिक इकाइयों को शहर के बाहरी इलाकों में बने डेजिग्नेटेड इंडस्ट्रियल जोन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज की जाए।
  • सड़क सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

प्रशासन का रुख

फिलहाल, नगर निगम के अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि औद्योगिक संगठनों के दबाव और रोजगार का हवाला देते हुए प्रशासन बार-बार इन इकाइयों को राहत देता रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार निवासियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देगी या फिर औद्योगिक हितों को साधने के लिए एक बार फिर नियमों में ढील दी जाएगी।

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