चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित।
(Major impact of SIR! 4.60 lakh voters in the final list) चंडीगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी हो गई है। चुनाव विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR से पहले दर्ज 5,16,427 मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची में 4,60,209 मतदाता रह गए हैं। यानी कुल 56,218 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। अंतिम सूची 22 सितंबर को जारी की गई।
SIR के दौरान 15 जून से 14 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया। इस प्रक्रिया में 5,16,427 मतदाताओं को कवर किया गया था। इनमें से 4,50,282 मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हुए थे।
ड्राफ्ट सूची के बाद जुड़े 9,927 नाम
21 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.50 लाख मतदाता शामिल थे। इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया। जांच और दावों के निपटारे के बाद 9,927 नए मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल किया गया। इसके बावजूद SIR से पहले की संख्या के मुकाबले अंतिम मतदाता संख्या कम रही।
66 हजार से ज्यादा फॉर्म नहीं मिले
SIR के दौरान करीब 66 हजार मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म हासिल नहीं हो सके। चुनाव अधिकारियों ने ऐसे मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए मतदाताओं की स्थिति की जांच की। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसी विसंगतियों की पहचान करना था।
अंतिम सूची में पुरुष मतदाता अधिक
अंतिम सूची के मुताबिक चंडीगढ़ में 2,34,516 पुरुष और 2,25,671 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 22 थर्ड जेंडर मतदाता भी सूची में दर्ज हैं। इस तरह कुल मतदाता संख्या 4,60,209 हो गई है।
35 वार्डों में नई मतदाता तस्वीर
चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्डों में अब अंतिम मतदाता सूची के आधार पर मतदाताओं का नया आंकड़ा तैयार होगा। SIR के बाद वार्डवार मतदाता संख्या में हुए बदलाव का असर आगामी नगर निगम चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ेगा।
अब मतदाता अपने नाम की जांच कर सकते हैं
अंतिम सूची जारी होने के बाद मतदाताओं के लिए अपने नाम और विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की सेवाओं के जरिए मतदाता सूची में नाम और विवरण से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।
नोट: “56,218 मतदाता घटे” का आंकड़ा SIR से पहले की सूची और अंतिम सूची के बीच का अंतर है; इसे अपने-आप में “इतने पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से हटाया गया” के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। चुनाव विभाग के अनुसार SIR में सत्यापन और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया भी शामिल थी।



















