द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ की एक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में 20 वर्षीय युवक को बरी कर दिया है। इस मामले में युवक पर 14 वर्षीय किशोरी के अपहरण और यौन उत्पीड़न का आरोप था, लेकिन अभियोजन पक्ष अदालत में इन आरोपों को साबित करने में असफल रहा। यह पूरा मामला 21 मार्च 2025 का है। दरिया के रहने वाले शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया था कि उसकी 14 वर्षीय बहन शाम करीब 5 बजे बाजार में राशन खरीदने गई थी और वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस शिकायत के आधार पर इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन में आरोपी युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 137(2), 87, 65(1) और 351(2) के साथ-साथ POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 24 मार्च 2025 को लड़की का पता लगाया। लड़की ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि आरोपी ने रेलवे स्टेशन के पास उसके साथ छेड़छाड़ की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी युवक की पैरवी कर रहे वकीलों मंदीप कुमार और कशिश जैन ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के मामले में कई विरोधाभास मौजूद हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस चिकित्सीय या अन्य निर्णायक साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा है, जिसके चलते अदालत ने उसे बरी कर दिया।













