मोहाली। राजवीर दीक्षित।
(Major setback in multi-crore fraud case! Bail rejected) पंजाब में निवेश पर 36% सालाना ब्याज देने का लालच देकर करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में आरोपी गुरप्रीत सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मोहाली जिला अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले में आरोपों की गंभीरता, कथित रकम और आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
यह मामला पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर (मोहाली) में दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 406, 420 और 120-B के साथ BUDS एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत कार्रवाई की गई है।
36% ब्याज का लालच देकर करोड़ों जुटाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, गुरप्रीत सिंह और उसके साथियों ने ‘अटालिया’ कंपनी के जरिए लोगों को निवेश के बदले 3% मासिक यानी 36% सालाना ब्याज देने का भरोसा दिलाया। आरोप है कि इस लालच में निवेशकों से ₹3.62 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई गई।
SEBI-RBI के नाम पर दिखाए कथित फर्जी दस्तावेज
जांच में यह आरोप सामने आया कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी को SEBI और RBI से पंजीकृत बताया गया और इसके समर्थन में दस्तावेज भी दिखाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी के पास इन नियामकों का ऐसा कोई वैध लाइसेंस या पंजीकरण नहीं था।
आरोपी पर पहले से करीब 9 FIR
अदालत के सामने अभियोजन ने बताया कि गुरप्रीत सिंह के खिलाफ पहले से करीब 9 FIR दर्ज हैं। वह 23 जून 2026 से हिरासत में है। अभियोजन ने इन मामलों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
कोर्ट ने रकम और आरोपों को गंभीर माना
अदालत ने माना कि मामले में कथित तौर पर शामिल रकम काफी बड़ी है और आरोपी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने यह भी माना कि सिर्फ चालान पेश हो जाने के आधार पर इतनी बड़ी कथित वित्तीय धोखाधड़ी में जमानत नहीं दी जा सकती।
अभियोजन ने यह भी दलील दी कि आरोपी का कोई स्थायी पता नहीं है और जमानत मिलने पर उसके फरार होने की आशंका है। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी को एक अन्य मामले में पहले Proclaimed Offender घोषित किया जा चुका है।
प्रभाव का इस्तेमाल करने का भी आरोप
अभियोजन के मुताबिक, होशियारपुर में आरोपी के प्रभाव के चलते शुरुआती शिकायतों और जांच को बंद कर दिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने चंडीगढ़ स्थित ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (BOI) में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला आगे बढ़ा।
बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी
बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि मामले की पहले भी जांच हो चुकी है और जांच अधिकारियों ने आरोपी को निर्दोष पाया था। वकील ने इसे मूल रूप से दीवानी प्रकृति का विवाद बताया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी हिरासत में होने के बावजूद उसके खिलाफ 5 FIR दर्ज की गईं। इनमें दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य फैसले के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि मामले में अधिकतम IPC की धारा 406 लागू होती है, जबकि BUDS एक्ट की धाराएं जोड़ने पर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा मोहाली में क्षेत्राधिकार न होने की दलील देते हुए कहा गया कि कथित अपराध होशियारपुर में हुआ था।
चालान पेश, लेकिन जमानत से इनकार
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश किया जा चुका है। साथ ही आरोपी को एक अन्य FIR में हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने का भी हवाला दिया गया।
हालांकि, इन दलीलों के बावजूद मोहाली जिला अदालत ने गुरप्रीत सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया के तहत चलेगा।



















