चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Badal Meets PM Modi: BJP-Akali Alliance Buzz “) पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद राज्य में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं, ऐसे में इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि वर्षों पुराने सहयोगी रहे भाजपा और अकाली दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं। दोनों दलों का गठबंधन 2022 के चुनाव से पहले कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। अब बदले राजनीतिक हालात में दोनों पार्टियां नए सिरे से चुनावी रणनीति पर विचार कर सकती हैं।
इस मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, “ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे…”। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा और अकाली दल फिर से गठबंधन करने जा रहे हैं। इसके जवाब में सुखबीर सिंह बादल ने भी पलटवार करते हुए पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा तथा राज्य में अवैध खनन समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।
वहीं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही दोनों दलों के फिर साथ आने की संभावना लग रही थी। उनके मुताबिक यदि भाजपा और अकाली दल फिर गठबंधन करते हैं तो पंजाब की राजनीति में नया मुकाबला देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और अकाली दल का गठबंधन कभी पंजाब की सबसे मजबूत चुनावी साझेदारी माना जाता था। अकाली दल का ग्रामीण और पंथक क्षेत्रों में प्रभाव रहा, जबकि भाजपा की पकड़ शहरी और हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत थी। दोनों का वोट बैंक एक-दूसरे का पूरक माना जाता था।
हालांकि अभी तक भाजपा या शिरोमणि अकाली दल की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल की यह मुलाकात आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों दल एक बार फिर साथ आकर 2027 के चुनावी मैदान में उतरेंगे या फिर यह केवल राजनीतिक अटकलें ही साबित होंगी।



















