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नेतन्याहू का बड़ा खुलासा: 7 अक्टूबर के हमले को सुरक्षा प्रमुखों ने समझा था महज एक सैन्य अभ्यास

नेतन्याहू का बड़ा खुलासा: 7 अक्टूबर के हमले को सुरक्षा प्रमुखों ने समझा था महज एक सैन्य अभ्यास

टारगेट न्यूज़: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2003 को हमास द्वारा किए गए भीषण आतंकवादी हमले को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील बयान दिया है, जिससे देश के सुरक्षा तंत्र और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेतन्याहू ने स्वीकार किया है कि इस बड़े हमले के शुरुआती पलों में देश के शीर्ष सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों ने इस घटना को एक साधारण सैन्य अभ्यास समझ लिया था, और इसी बड़ी भूल के कारण उन्हें समय पर नींद से नहीं जगाया गया। इस खुलासे के बाद इजरायल की राजनीति और रक्षा हलकों में भारी भूचाल आ गया है, क्योंकि युद्ध की विभीषिका के शुरुआती घंटों में देश के सर्वोच्च नेतृत्व का अंधेरे में रहना एक अक्षम्य सुरक्षा चूक मानी जा रही है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि 7 अक्टूबर के हमले के समय उन्हें जानबूझकर या लापरवाही के कारण नहीं जगाया गया था।
  • शीर्ष सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों ने शुरुआती संकेतों को एक रूटीन मिलिट्री ड्रिल मानकर नजरअंदाज कर दिया था।
  • इस बड़े खुलासे से राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच सुरक्षा तंत्र के खिलाफ नाराजगी और अधिक बढ़ गई है।
  • इजरायल में इस घटना को लेकर उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

गत 7 अक्टूबर को इजरायल की सीमाओं पर जो कुछ हुआ, वह आधुनिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। हमास के आतंकवादियों ने गाजा पट्टी से इजरायली सीमा में घुसपैठ कर अभूतपूर्व तबाही मचाई थी, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की जान चली गई थी और कई लोगों को बंधक बना लिया गया था। इस अप्रत्याशित और भीषण हमले के बाद से ही नेतन्याहू सरकार पर खुफिया विफलता और देश की सुरक्षा करने में नाकाम रहने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा अब यह स्वीकार किया जाना कि सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को समय रहते नहीं पहचाना, इस बात को पुष्ट करता है कि उस दिन कमांड और कंट्रोल सिस्टम में भारी विफलता आई थी।

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जब सुबह-सुबह हमास के लड़ाके रॉकेट दाग रहे थे और बाड़ को तोड़कर अंदर घुस रहे थे, तब स्थानीय सैन्य कमांडरों और खुफिया अधिकारियों ने इसे एक नियमित अभ्यास के रूप में मूल्यांकित किया। उनका मानना था कि यह इजरायली सेना द्वारा आयोजित कोई युद्धाभ्यास है। इस गलतफहमी के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य प्रमुख मंत्रियों तक खतरे की सटीक जानकारी पहुंचने में कई घंटे की भारी देरी हो गई। जब तक इजरायली नेतृत्व को वास्तविक स्थिति का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और आतंकवादी बड़े पैमाने पर नरसंहार को अंजाम दे चुके थे।

इस बयान के सामने आने के बाद इजरायल की जनता और विपक्षी दलों में अत्यधिक रोष व्याप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान नेतन्याहू द्वारा अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश भी हो सकता है, क्योंकि वे लगातार खुफिया एजेंसियों और सेना को इस विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराते आए हैं। दूसरी ओर, सेना के कई पूर्व अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री इस बात से बच नहीं सकते कि वे देश के सर्वोच्च कार्यकारी प्रमुख हैं और संकट के समय हर सूचना पर त्वरित नजर रखना उनका मुख्य दायित्व था।

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयानों और अंदरूनी सूत्रों की रिपोर्टों से यह स्पष्ट हो गया है कि 7 अक्टूबर की सुबह इजरायली खुफिया तंत्र और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय पूरी तरह चरमरा गया था, जिसके विनाशकारी परिणाम पूरे देश को भुगतने पड़े।

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

बेंजामिन नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब गाजा में संघर्ष अभी भी जारी है और इजरायल के भीतर आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। इस खुलासे के दूरगामी परिणाम इजरायल की राजनीति पर पड़ेंगे। युद्ध समाप्त होने के बाद इस पूरे घटनाक्रम की एक व्यापक और स्वतंत्र न्यायिक जांच होना तय माना जा रहा है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि आखिर कैसे दुनिया की सबसे आधुनिक खुफिया एजेंसियों में शुमार मोसाद और शिन बेट इतनी बड़ी चूक कर बैठे। यह बयान इस बात का भी संकेत है कि इजरायल का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व आने वाले दिनों में और अधिक तीखे संघर्षों का गवाह बनने वाला है, क्योंकि जनता अब इस ऐतिहासिक चूक के लिए सीधे तौर पर जवाबदेही चाहती है।

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