टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: पंजाब के मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की निर्मम हत्या के बाद से राज्यभर में भारी रोष और तनाव का माहौल है। पूर्व सैनिक और मृतक के पिता भीम सिंह ने मंगलवार देर रात धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि जब तक संघर्ष समिति का गठन और उसकी भागीदारी नहीं होगी, तब तक वे पुलिस या सरकार के साथ किसी भी प्रकार की आधिकारिक बातचीत में शामिल नहीं होंगे। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई जगहों पर प्रदर्शन जारी हैं।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- मृतक परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने बिना संघर्ष समिति के पुलिस या सरकार से बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है।
- मानसा में दो अलग-अलग जगहों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं – एक तिनकोनी चौक पर और दूसरा सिविल अस्पताल के बाहर।
- विशेष डीजीपी प्रवीण कुमार सिन्हा ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया है कि शव का जबरन अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
- गोलीबारी की इस घटना में झोटा का एक करीबी साथी कुलवेंद्र सुखी भी घायल हुआ है, जिसके पैर में गोली लगी है।
- परिजनों और समर्थकों की मांग है कि हत्यारे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और नशा तस्करों के नेटवर्क का पर्दाफाश हो।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
यह पूरी घटना मंगलवार को मानसा में एक मेडिकल स्टोर या केमिस्ट की दुकान पर शुरू हुई थी। मृतक परविंदर सिंह झोटा, जो लंबे समय से इलाके में नशामुक्ति और नशा तस्करों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, की एक केमिस्ट के साथ तीखी बहस हो गई। यह बहस इतनी बढ़ गई कि केमिस्ट ने कथित तौर पर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस हमले में परविंदर सिंह झोटा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका साथी कुलवेंद्र सुखी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। मंगलवार रात से ही मानसा के बरनाला-सिरसा रोड पर स्थित तिनकोनी चौक (जो उपायुक्त आवास के नजदीक है) और सिविल अस्पताल के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गए। अस्पताल के बाहर प्रदर्शनकारियों ने कड़ा पहरा लगा दिया है ताकि बिना परिवार की सहमति के शव को वहां से हटाया न जा सके। बुधवार की सुबह कुछ राजनीतिक संगठनों और जत्थेबंदियों के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से रोकने के लिए हिरासत में ले लिया है, जिससे तनाव और अधिक बढ़ गया है।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तुरंत मानसा पहुंचे। स्थिति को संभालने के लिए विशेष डीजीपी प्रवीण कुमार सिन्हा ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी सूरत में जबरन अंतिम संस्कार जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और दोषियों को कानून के शिकंजे में कसा जाएगा। दूसरी ओर, पिता भीम सिंह का दर्द और गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने रातभर धरने पर बैठे लोगों का आभार जताया और पंजाब के लोगों के हक में लड़ने की बात कही।
जो लोग यहां रातभर कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं, वे मेरे लिए भगवान के समान हैं। मैंने एक पिता के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है। मैं पंजाब के लोगों से कभी मुंह नहीं मोड़ूंगा। हम गरीबी और भुखमरी सह लेंगे, लेकिन किसी भी लालच या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। मेरे बेटे ने समाज के लिए शहादत दी है, और हम न्याय लेकर ही रहेंगे। – भीम सिंह, मृतक के पिता
आगे क्या? (What Lies Ahead)
वर्तमान में मानसा का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। परिवार और संघर्ष समिति की अगली रणनीति के बाद ही यह तय होगा कि अंतिम संस्कार कब और कैसे किया जाएगा। पुलिस और खुफिया एजेंसियां हत्यारे केमिस्ट और उसके संभावित सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन पर इस हाई-प्रोफाइल मामले में त्वरित न्याय दिलाने का भारी दबाव है। यदि जल्द ही ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन पंजाब के अन्य जिलों में भी फैल सकता है, जिस पर सरकार और प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।


















