टारगेट न्यूज़ संवाददाता: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक कस्बे बिहारigarh में इन दिनों पारंपरिक खान-पान और विशेष रूप से पकोड़ा व्यापार से जुड़े व्यापारी गहरी आर्थिक मंदी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। कभी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और यात्रियों से गुलजार रहने वाली यह सड़क अब सूनी नजर आने लगी है। नए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद से यात्रियों ने इस पुराने मार्ग से दूरी बना ली है, जिसके कारण यहां के छोटे-बड़े भोजनालयों और पकोड़े की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बदलाव ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और वहां की दशकों पुरानी खान-पान संस्कृति पर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे दुकानदारों के सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी एक चुनौती बनता जा रहा है।
ताज़ा अपडेट्स और मुख्य बिंदु (Fresh Updates)
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद से बिहारigarh के पारंपरिक पकोड़ा और स्नैक्स बाजार में ग्राहकों की संख्या में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।
- स्थानीय दुकानदारों ने सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि एक्सप्रेसवे से इस कस्बे तक सीधी कनेक्टिविटी या एग्जिट प्वाइंट दिए जाएं ताकि पर्यटक पुनः आकर्षित हो सकें।
- पुराने हाईवे पर यातायात न होने के कारण कई छोटे भोजनालय पूरी तरह से बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है।
- व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने अपनी इस पारंपरिक पाक कला और विरासत को बचाने के लिए विशेष विकास योजनाओं की मांग उठाई है।
विस्तार से समझें पूरा मामला (In-Depth Explanation)
बिहारigarh लंबे समय से दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से देहरादून, मसूरी और अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख विश्राम स्थल रहा है। यहां के गर्म पकोड़े, चाय और स्थानीय व्यंजन यात्रा करने वाले लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। पीढ़ियों से लोग सफर के दौरान विशेष रूप से इस कस्बे में रुककर এখানকার खान-पान का आनंद लेते थे। यह व्यापार न केवल स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य साधन था, बल्कि यह इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। हालांकि, आधुनिक विकास की दौड़ में जब सरकार ने यातायात को सुगम और तेज बनाने के लिए अत्याधुनिक दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण किया, तो उसने इस पारंपरिक मार्ग के वाणिज्यिक महत्व को हाशिए पर धकेल दिया। एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद अधिकांश यात्री अब बिना किसी ठहराव के तेज गति से अपने गंतव्य तक निकल जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, पुराने मार्ग पर वाहनों का आवागमन न के बराबर रह गया है और बिहारigarh के बाजार सन्नाटे में तब्दील हो गए हैं। स्थानीय व्यापारी अब पूरी तरह से केवल स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर रह गए हैं, जिनकी क्रय शक्ति और संख्या दोनों ही पर्यटकों की तुलना में काफी कम है। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के चक्कर में हम अपनी पारंपरिक धरोहरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था की अनदेखी कर रहे हैं।
सामाजिक व आर्थिक प्रभाव (Social & Economic Impact)
इस व्यापारिक मंदी का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव इस क्षेत्र की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ रहा है। कई परिवार जो दशकों से इस खान-पान व्यवसाय से जुड़े हुए थे, वे अब कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। युवाओं के पास रोजगार के अवसर समाप्त होने के कारण पलायन की समस्या भी सिर उठाने लगी है। यदि इस स्थिति पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो बिहारigarh की यह विशिष्ट पकोड़ा संस्कृति इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी। स्थानीय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पारंपरिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्थाओं के संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाई जानी चाहिए, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच सके।
स्थानीय व्यापारी संघ के अध्यक्ष ने कहा, हमने पीढ़ियों से इस व्यापार को सींचा है और इसे अपनी पहचान बनाया है। एक्सप्रेसवे जरूरी है, लेकिन अगर प्रशासन ने इस पुराने मार्ग को इस तरह अनदेखा कर दिया, तो हमारी आजीविका और हमारी सदियों पुरानी संस्कृति पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। हमें एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक संपर्क मार्ग की सख्त जरूरत है।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Summary & Outlook)
अंततः यह स्पष्ट है कि आधुनिकीकरण और एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट देश की प्रगति के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन के दौरान स्थानीय स्तर पर आजीविका और पारंपरिक व्यवसायों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का आकलन करना भी उतना ही अनिवार्य है। बिहारigarh के पकोड़ा व्यवसाय को पुनर्जीवित करने के लिए यह आवश्यक है कि पर्यटन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर कोई ठोस रणनीति बनाएं। यदि एक्सप्रेसवे से इस क्षेत्र के लिए आसान पहुंच या विशेष पर्यटन स्टॉप की व्यवस्था कर दी जाए, तो न केवल यहां के व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि यात्रियों को भी एक बार फिर से अपनी पुरानी और पसंदीदा विरासत का आनंद लेने का अवसर मिल सकेगा।


















