अमृतसर। राजवीर दीक्षित
(President Murmu Highlights Guru Nanak’s Message of Social Harmony in Amritsar)अमृतसर की पावन धरती से सामाजिक सद्भाव, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों को आज के समय में और भी प्रासंगिक बताया। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि “नाम जपो, किरत करो, वंड छको” केवल एक धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का सार्वकालिक सूत्र है, जिसे अपनाकर समाज की अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है।
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उन्होंने अमृतसर को भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए कहा कि स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग और दुर्गियाना मंदिर जैसी धरोहरें इस शहर को विशेष पहचान देती हैं। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
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महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता के पुरस्कार प्राप्त करने वालों में 99 प्रतिशत छात्राएं थीं। इसे शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं देश की कार्यबल का 50 प्रतिशत हिस्सा हैं और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में उनकी भूमिका निर्णायक है।
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राष्ट्रपति ने साहस की नई परिभाषा देते हुए कहा कि केवल आगे बढ़ना ही साहस नहीं, बल्कि अपने साथ उन लोगों को भी आगे ले जाना जो पीछे रह गए हैं, यही सच्चा साहस है। पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इसका स्थायी समाधान तभी संभव है जब युवा, युवाओं से जुड़ें और शिक्षा को सुलभ व समावेशी बनाया जाए।
अंत में उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक सोच, जिम्मेदारी की भावना और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के साथ भविष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

















