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पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय में बताई महंगाई भत्ते के बकाए की देनदारी, कुल आंकड़ा 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक

पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय में बताई महंगाई भत्ते के बकाए की देनदारी, कुल आंकड़ा 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक

दी टारगेट न्यूज़:

पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष दायर अपने एक स्थिति रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि राज्य पर महंगाई भत्ते (DA) के बकाए और अन्य दावों की कुल लंबित देनदारी लगभग 32,418 करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले डीए बकाए की देनदारी 22,818 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की दरों पर डीए के भुगतान से लगभग 4,712 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की आवर्ती (recurring) देनदारी भी जुड़ेगी। मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा द्वारा दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि संशोधित अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का वार्षिक वेतन और पेंशन खर्च लगभग 58,064 करोड़ रुपये है, और इस वित्तीय दायित्व को उचित बजटीय प्रावधानों के माध्यम से पूरा किया जाना है। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि उच्च न्यायालय का 3 अगस्त का फैसला राज्य पर बाध्यकारी है और इसके संचालन पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, जिसके तहत 6 प्रतिशत ब्याज के साथ डीए बकाया भुगतान की जिम्मेदारी बनी हुई है। डीए निर्देशों के कार्यान्वयन को लेकर मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 18 सितंबर को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों पर एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में डीए को 8 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद वित्त विभाग ने 23 सितंबर के आदेशों के तहत डीए की दर को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। यह बढ़ा हुआ डीए 1 सितंबर से लागू किया गया और अक्टूबर में वितरित किए गए सितंबर के वेतन व पेंशन में इसे जोड़कर जारी किया गया। विलंब के कारणों पर सफाई देते हुए राज्य ने बताया कि उसने 1 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर 3 अगस्त के फैसले को चुनौती दी थी, जिसे रजिस्ट्री द्वारा प्रक्रियात्मक कमियां बताए जाने के बाद 1 अक्टूबर को दोबारा दायर किया गया। सरकार ने तर्क दिया कि भुगतान में देरी जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण नहीं थी, क्योंकि अदालत के फैसले में ही निर्धारित अवधि के बाद अवैतनिक राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान किया गया है। राज्य ने न्यायालय को यह भी आश्वस्त किया कि उसने कभी भी उच्च अदालत की गरिमा को कम करने का प्रयास नहीं किया है और उपस्थिति से जुड़े सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया है। इस मामले और इससे जुड़े अन्य मामलों में याचिकाकर्ताओं और आवेदकों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल और चेतन मित्तल के साथ-साथ अधिवक्ता गग्नेश्वर वालिया, हरगुन सेठी, सनी सिंगला, रीति अग्रवाल और अर्जुन कौशल कर रहे हैं।

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