न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की पीठ ने तीनों आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश दिया। यह राहत फिलहाल अस्थायी है और मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
सप्लीमेंट्री चालान को लेकर विवाद
तीनों याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने जांच एजेंसी को कुछ आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चालान दाखिल करने के लिए निर्देश दिए थे। उनके अनुसार, विजिलेंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर दिए गए निर्देशों से जांच एजेंसी की स्वतंत्रता प्रभावित हुई।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस तरह के हस्तक्षेप से उनके खिलाफ पहले ही निष्कर्ष निकालने जैसी स्थिति बनी और बचाव के अधिकार पर असर पड़ा। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
संदीप संधू ने आदेशों को दी चुनौती
संदीप सिंह संधू ने विशेष अदालत के कई अंतरिम आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनकी दलील थी कि जांच जल्द पूरी करने के निर्देशों के साथ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दाखिल करने का दबाव बनाया गया।
संधू ने संबंधित आदेशों को रद्द करने की मांग की है।
गौरव शर्मा और हरप्रीत सिंह की याचिकाएं
आरोपी गौरव शर्मा ने 29 मई 2025 को उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज किए जाने और 18 जुलाई 2025 को आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी। हरप्रीत सिंह ने भी इन आदेशों और आरोपपत्र के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2022 में पंजाब में सरकार बदलने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उन्होंने अप्रैल 2025 के आदेश का हवाला देते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
16 अक्टूबर को अगली सुनवाई
यह मामला वर्ष 2021-22 में लुधियाना के विभिन्न गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए निर्धारित ₹65 लाख के कथित गबन से संबंधित है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गईं।
हाईकोर्ट ने फिलहाल तीनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ संबंधित मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई है। 16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी। यह आदेश आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का अंतिम फैसला नहीं है।


















