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किरतपुर साहिब के 400 वर्ष एसजीपीसी आयोजित करेगा धार्मिक कार्यक्रम, सरकार ने भूमिका सीमित रखी !

किरतपुर साहिब/रूपनगर । राजवीर दीक्षित

(SGPC to organize religious events for 400 years of Kiratpur Sahib; government keeps its role limited!) 1 मई को ऐतिहासिक नगर किरतपुर साहिब अपनी स्थापना के 400 वर्ष पूरे करेगा। इस अवसर को मनाने के लिए एसजीपीसी 29 अप्रैल से 1 मई तक अखंड पाठ, कीर्तन दरबार और नगर कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।

राज्य सरकार ने इस आयोजन में संतुलित रुख अपनाते हुए अपनी भूमिका मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने, ट्रैफिक प्रबंधन और बुनियादी नागरिक सुविधाओं तक सीमित रखी है।
अधिकारियों के अनुसार, “जिला प्रशासन लॉजिस्टिक सहयोग में समन्वय कर रहा है, लेकिन सरकार जानबूझकर इस भूमिका से दूरी बनाए हुए है।”

यह सतर्क रुख पिछले वर्ष श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के दौरान हुए विवाद के बाद राज्य सरकार और एसजीपीसी के बीच तनावपूर्ण संबंधों के मद्देनज़र अपनाया गया है।

किरतपुर साहिब की स्थापना मई 1626 में छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद जी ने की थी। इसे शांति, आध्यात्मिकता और शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया था।

शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में सतलुज नदी के किनारे बसे इस स्थान ने सिख विचारधारा और गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रूप लिया। कई सिख गुरु, जिनमें गुरु हर राय और गुरु हरकृष्ण शामिल हैं, यहां निवास कर चुके हैं। यही वह स्थान भी है जहां आठवें गुरु ने ज्योति ज्योत समाई।

किरतपुर साहिब के प्रमुख गुरुद्वारों में गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब (जहां कई सिख गुरुओं का अंतिम संस्कार हुआ), गुरुद्वारा चरण कमल साहिब, गुरुद्वारा शीश महल और गुरुद्वारा बाबा गुरदित्त्ता शामिल हैं।
श्री आनंदपुर साहिब, जो बाद में गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में राजनीतिक और सैन्य केंद्र के रूप में उभरा, के विपरीत किरतपुर साहिब ने अपनी शांत आध्यात्मिक पहचान बनाए रखी। यह स्थान सिख अंतिम संस्कार परंपराओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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