चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने अपने साझेदार राज्यों से जुड़े कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से छह महीने पहले उनके मूल (पैरेंट) राज्यों में वापस भेजने का फैसला किया है। इस कदम से पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे BBMB में मैनपावर संकट और गहरा होने की आशंका है।
यह फैसला हाल ही में हुई BBMB बोर्ड की बैठक में साझेदार राज्यों के अनुरोध के बाद लिया गया। बोर्ड में काम कर रहे कर्मचारियों से जुड़े पेंशन संबंधी विसंगतियों के चलते यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। करीब 12 कर्मचारियों के रिपैट्रिएशन ऑर्डर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। एक मामले में तो एक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति में केवल 10 दिन बाकी रहते उसके मूल राज्य में वापस भेज दिया गया।
BBMB में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी कार्यरत हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारी ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत के अनुसार किसी भी साझेदार राज्य के वेतनमान का विकल्प चुन सकते हैं। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के वेतनमान आमतौर पर अन्य साझेदार राज्यों से अधिक होने के कारण BBMB में कार्यरत अधिकांश कर्मचारियों ने पंजाब के वेतनमान को चुना है।
हालांकि, कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद यही व्यवस्था पेंशन को लेकर विवाद का कारण बन गई है। कर्मचारियों की पेंशन उनके संबंधित मूल राज्यों की ओर से दी जाती है, लेकिन कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अदालतों का रुख करते हुए BBMB में सेवा के दौरान मिले अधिक अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन लाभ देने की मांग की है। इसके चलते कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने मूल विभागों में काम करने वाले समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक पेंशन मिल रही है।
सूत्रों के अनुसार, साझेदार राज्यों ने इसी वजह से छह महीने पहले रिपैट्रिएशन की व्यवस्था पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी अपने मूल विभाग से ही सेवानिवृत्त हों और संबंधित राज्य की सेवा व्यवस्था के अनुसार पेंशन प्राप्त करें।
कर्मचारी यूनियनों ने किया विरोध
BBMB कर्मचारी यूनियनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और बोर्ड से इसे वापस लेने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि जिन कर्मचारियों ने अपने करियर का लगभग पूरा समय BBMB को दिया है, उन्हें सेवानिवृत्ति से महज छह महीने पहले मूल विभागों में वापस भेजना उचित नहीं है। यूनियनों ने इस निर्णय को अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक बताया है।
पंजाब इससे पहले भी BBMB में काम कर रहे दूसरे राज्यों के कर्मचारियों को PSPCL के वेतनमान देने का विरोध कर चुका है।
330 कर्मचारियों की जल्द हो सकती है सेवानिवृत्ति
यह फैसला BBMB के लिए ऐसे समय में आया है जब संगठन पहले से ही तकनीकी कर्मचारियों की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। आने वाले महीनों में करीब 330 कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है।
पंजाब के हिस्से में BBMB में स्वीकृत 3,297 तकनीकी पदों में से करीब 1,486 पद खाली हैं। यानी कुल तकनीकी पदों का लगभग 45 प्रतिशत खाली पड़ा है। इनमें 568 फोरमैन के पद भी शामिल हैं, जो भाखड़ा बांध, डैम गैलरी, स्पिलवे गेट, टर्बाइन और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण मरम्मत एवं रखरखाव व्यवस्था संभालते हैं।
भर्ती में देरी से भी बढ़ी परेशानी
BBMB में स्टाफ संकट को पंजाब की ओर से अलग कैडर बनाने में हो रही देरी ने और बढ़ा दिया है। करीब सात महीने पहले पंजाब कैबिनेट ने BBMB में पंजाब कोटे के लगभग 2,500 खाली पदों को भरने के लिए विशेष कैडर बनाने को मंजूरी दी थी। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि सरकार ने जरूरी भर्ती नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया है।
BBMB में पंजाब की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत है। इसके बावजूद पंजाब करीब दो दशकों से अपने हिस्से के कर्मचारी कोटे को भरने में संघर्ष कर रहा है।
BBMB सतलुज और ब्यास नदियों के जल प्रबंधन के साथ-साथ चार राज्यों में महत्वपूर्ण बांध, सिंचाई और जलविद्युत ढांचे के संचालन के लिए जिम्मेदार रहा है। तकनीकी कर्मचारियों की लगातार बढ़ती कमी अब बोर्ड के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।



















