Home India पटाखों पर SC का बड़ा बयान! आदेश नहीं माने तो बनेगा मजाक

पटाखों पर SC का बड़ा बयान! आदेश नहीं माने तो बनेगा मजाक

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

 

(SC’s major statement on firecrackers! Disregarding the order will lead to ridicule) दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल और वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन आदेशों का जमीन पर पालन होना जरूरी है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि हर साल निर्देश जारी करने के बावजूद उनका पालन नहीं हुआ, तो आदेश देना महज मजाक बनकर रह जाएगा।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों से प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने और नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा।

SC की दोटूक—सिर्फ आदेशों से नहीं सुधरेगी हवा

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी।

पीठ ने कहा कि केवल आदेश जारी करने से कुछ नहीं होगा, जब तक उन्हें जमीन पर लागू नहीं किया जाता। अदालत ने अधिकारियों को मौके पर जाकर कार्रवाई करने और पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने की हिदायत दी।

कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए खेल जगत की प्रमुख हस्तियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की मदद ली जा सकती है। अदालत के अनुसार, इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है।

दिल्ली सरकार ने तैयार किया प्रदूषण नियंत्रण प्लान

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक योजना बनाई है। इसमें पुराने वाहनों पर नियंत्रण, निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पाबंदियां तथा सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार ने कहा कि नवंबर में प्रदूषण बढ़ने के संभावित दौर को देखते हुए कई उपाय लागू किए जाएंगे।

बेरियम वाले पटाखों पर 3 हफ्ते बाद फैसला

पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार की आंतरिक चर्चा अभी पूरी नहीं हुई है। ऐश्वर्या भाटी ने इसके लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर तीन सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।

अदालत में एमिकस क्यूरी की ओर से पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कणों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का मुद्दा भी उठाया गया। दलील दी गई कि ये कण फेफड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही, बाजार में बिक रहे पटाखे वास्तव में निर्धारित मानकों वाले ग्रीन पटाखे हैं या नहीं, इसकी जांच व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए।

ग्रीन पटाखों पर सशर्त छूट का विकल्प

सुनवाई में कम उत्सर्जन वाले नए ग्रीन पटाखों का मुद्दा भी उठा। CSIR-NEERI की सिफारिशों के आधार पर कुछ विशेष पटाखों को सीमित और सशर्त अनुमति देने के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया। इनके लिए लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं से उत्पादन, निर्धारित शोर सीमा और प्रतिबंधित रसायनों से जुड़े नियमों का पालन जरूरी बताया गया।

हालांकि, इन पटाखों की अनुमति और इस्तेमाल को लेकर अंतिम स्थिति अदालत के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगी।

पहले भी तय समय में पटाखे जलाने की बात कह चुका है SC

30 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय बीच का रास्ता तलाशेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि चौबीसों घंटे पटाखे जलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस्तेमाल के लिए निश्चित समय तय करना जरूरी है।

पिछले साल भी अदालत ने दिल्ली-NCR में दिवाली के दौरान ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को सीमित अवधि के लिए सशर्त अनुमति दी थी।

अब सवाल सिर्फ पटाखों पर रोक का नहीं, बल्कि नियमों के पालन का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के आदेश तभी प्रभावी होंगे, जब प्रशासन उन्हें सख्ती से लागू करेगा और लोग भी जिम्मेदारी निभाएंगे।

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