Home पंजाब सिंगर गिल रौंता की सियासी एंट्री, ‘वारिस पंजाब दे’ का थामा हाथ

सिंगर गिल रौंता की सियासी एंट्री, ‘वारिस पंजाब दे’ का थामा हाथ

चंडीगढ़/मोहाली। राजवीर दीक्षित

(Singer Gill Raunta enters politics; joins ‘Waris Punjab De’) पंजाबी संगीत जगत के प्रसिद्ध गायक और लेखक गिल रौंता ने अब सियासी मंच पर भी कदम रख दिया है। गिल रौंता मोहाली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘वारिस पंजाब दे’ में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम में संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष बापू तरसेम सिंह, वरिष्ठ नेता एवं दाखा विधायक मनप्रीत सिंह इयाली और लोकसभा सदस्य सरबजीत सिंह खालसा मौजूद रहे।

गिल रौंता के पार्टी में शामिल होने के साथ ही मोहाली में ‘वारिस पंजाब दे’ की पुआध इकाई के नए कार्यालय का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के दौरान संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और पुआध क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।

गिल रौंता ने कहा कि पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत से जुड़े मुद्दे हमेशा उनकी प्राथमिकता रहे हैं। अब संगठन के माध्यम से लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं और आवाज को उठाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों से सीधा संपर्क रखना और उनके मुद्दों को समझना जरूरी है। संगठन के जरिए पंजाब से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखने के साथ लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाने की कोशिश की जाएगी।

वहीं, दाखा विधायक मनप्रीत सिंह इयाली ने गिल रौंता के संगठन के साथ जुड़ने को सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी शख्सियतों का संगठन के साथ आना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, संगठन का उद्देश्य पंजाबियों की भावनाओं और लोगों की उम्मीदों की आवाज को मजबूती से उठाना है। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया।

पुआध इकाई के नए कार्यालय को भी संगठन के लिए अहम कदम माना जा रहा है। नेताओं के मुताबिक, यहां से क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों को संचालित करने के साथ कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ लगातार संपर्क कायम किया जाएगा। कार्यालय में आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर समन्वय किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरु साहिब की ओट-आसरे के साथ हुई। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने तथा पुआध क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने को लेकर अपने विचार रखे।

गिल रौंता की एंट्री के बाद अब देखना होगा कि पंजाबी संगीत से जुड़े चेहरे की यह सियासी पारी संगठन की जमीनी गतिविधियों को किस तरह प्रभावित करती है।

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