चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Uproar at Municipal Corporation House meeting! Councilor Dhingra suspended) चंडीगढ़ नगर निगम की मंगलवार को हुई जनरल हाउस बैठक में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर AAP पार्षद योगेश ढींगरा और भाजपा पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हुआ। ढींगरा ने पहले पांच पार्षदों पर भ्रष्टाचार और कथित लेन-देन से जुड़े आरोप लगाए थे। बैठक में भाजपा पार्षद गुरबख्श रावत ने उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद मेयर सौरभ जोशी ने वोटिंग कराकर ढींगरा को बैठक की शेष कार्यवाही से निलंबित कर दिया।
आरोपों पर सदन में मांगे गए सबूत
बैठक के दौरान मेयर ने ढींगरा से उनके सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों के समर्थन में सबूत सदन के सामने रखने को कहा। मेयर ने कहा कि गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो उनके आधार और संबंधित तथ्य भी स्पष्ट किए जाने चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, सदन में ढींगरा की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी चलाई गई। मेयर ने उन्हें पांच पार्षदों के नाम और आरोपों से संबंधित प्रमाण सामने रखने के लिए समय दिया।
ढींगरा ने DGP को दी शिकायत का हवाला दिया
ढींगरा ने जवाब में DGP को दी गई शिकायत का हवाला दिया। उनका कहना था कि शिकायत के साथ कथित सबूतों वाली पेन ड्राइव भी दी गई है और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। AAP पार्षदों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई।
वहीं, भाजपा पार्षदों ने आरोपों के समर्थन में सदन में प्रमाण रखने की मांग की। भाजपा की ओर से कहा गया कि पार्षदों पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इन्हें तथ्य एवं दस्तावेजों के साथ स्पष्ट किया जाना चाहिए।
वोटिंग के बाद ढींगरा निलंबित
मामला बढ़ने के बाद मेयर ने ढींगरा के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सदन में वोटिंग कराई। भाजपा पार्षदों ने निलंबन के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद ढींगरा को सदन की शेष कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया।
25 लाख और डड्डूमाजरा प्लांट का भी उठा मुद्दा
ढींगरा की पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़े आरोपों में 25 लाख रुपये और डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में प्रस्तावित प्लांट से संबंधित एजेंडा का भी जिक्र हुआ था। उन्होंने एक ठेकेदार और भाजपा पार्षद के पति के बीच कथित विवाद का दावा किया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष जांच के दौरान स्पष्ट होना बाकी है।
बुडैल के कचरे को लेकर भी फैसला
बैठक में बुडैल से निकलने वाले कचरे को सेक्टर-45 स्थित एसएसके में डालने से संबंधित एमओयू को मंजूरी देने का मुद्दा भी आया। वार्ड-34 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने इस पर कहा कि इससे सेक्टर-45 और 46 के निवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
गाबी ने निगम की प्रस्तावित स्वच्छता प्रतियोगिता पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क था कि यदि एक वार्ड का कचरा दूसरे वार्ड में लाकर डाला जाएगा तो सभी वार्डों को समान परिस्थितियों में स्वच्छता प्रतियोगिता में शामिल करना मुश्किल होगा।
Solid Waste Management Bye-Laws को मंजूरी
जनरल हाउस ने Solid Waste Management Bye-Laws, 2026 को भी मंजूरी दी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा डोर-टू-डोर कचरा संग्रह शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
इस तरह निगम की बैठक में भ्रष्टाचार के आरोपों से शुरू हुआ विवाद निलंबन तक पहुंचा, जबकि कचरा प्रबंधन और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में चर्चा हुई।



















