टारगेट न्यूज़: अमेरिकी राजनीतिक गलियारों और सैन्य हलकों में इन दिनों ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो चुका है। खासतौर पर जब से डोनाल्ड ट्रंप और उनके रणनीतिकारों ने ईरान के परमाणु और सामरिक ठिकानों पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं, तब से दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों की निगाहें वाशिंगटन की अगली चाल पर टिकी हुई हैं। इस बीच, अमेरिकी सैन्य रणनीतिकारों द्वारा दुनिया के सबसे शक्तिशाली पारंपरिक बमों में गिने जाने वाले ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ यानी MOAB (Massive Ordnance Air Blast) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर मंथन किया जा रहा है। हालांकि, आधुनिक रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि ईरान के अत्यधिक सुरक्षित, भूमिगत और गहरे बंकरों में बने परमाणु संयंत्रों के खिलाफ यह भारी-भरकम बम पूरी तरह बेअसर या सीमित प्रभाव वाला साबित हो सकता है। तेहरान की ओर से अपनी सामरिक संपत्तियों को जमीन के अंदर सैकड़ों फीट नीचे पहाड़ों और कंक्रीट की मजबूत परतों के बीच संरक्षित किया गया है, जहां तक पहुंचने के लिए पारंपरिक हथियारों की क्षमता सीमित हो जाती है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर क्यों ट्रंप प्रशासन की यह कथित योजना धरातल पर उम्मीदों के मुताबिक परिणाम देने में विफल हो सकती है और इसके पीछे की तकनीकी व सामरिक वजहें क्या हैं।
मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों के लिए MOAB के इस्तेमाल पर सैन्य चर्चाएं शुरू हुई हैं।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, MOAB की मारक क्षमता अत्यधिक गहरे और कंक्रीट से सुरक्षित बंकरों के खिलाफ सीमित है।
- जमीन के अंदर बंकरों को भेदने के लिए जीबीयू-57 (GBU-57) पेनेट्रेटर जैसे विशेष बंकर-बस्टर हथियारों को अधिक उपयुक्त माना गया है।
- MOAB का मुख्य प्रभाव मनोवैज्ञानिक होता है, लेकिन रणनीतिक रूप से कड़े लक्ष्यों के खिलाफ इसका उपयोग सवालों के घेरे में है।
विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के मद्देनजर अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान में विभिन्न विकल्पों पर विचार करना कोई नई बात नहीं है। जब भी तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों पर लगाम कसने की बात आती है, तो पेंटागन के रणनीतिकार तमाम विकल्पों की समीक्षा करते हैं। इसी कड़ी में, जीयूयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट, जिसे आमतौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ कहा जाता है, का नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। इस बम को अपने विशाल आकार और जबरदस्त विस्फोट क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ठिकानों पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना और सतही बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करना होता है। लेकिन जब बात ईरान की आती है, तो स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। ईरान ने अपनी अधिकांश संवेदनशील और परमाणु अनुसंधान से जुड़ी सुविधाओं को सामान्य सतह पर नहीं, बल्कि जाग्रोस पर्वत श्रृंखलाओं के नीचे और जमीन के अंदर कई सौ फीट की गहराई में भारी-भरकम प्रबलित कंक्रीट (reinforced concrete) से सुरक्षित किया हुआ है। ऐसी संरचनाओं को भेदने के लिए केवल एक बड़े विस्फोट की नहीं, बल्कि अत्यधिक गति और विशेष डिजाइन वाले मटीरियल की आवश्यकता होती है जो चट्टान और कंक्रीट को चीरते हुए अंदर तक जा सके।
रक्षा विशेषज्ञों और एयरोस्पेस इंजीनियरों का यह भी तर्क है कि MOAB को मुख्य रूप से सतह के ऊपर बड़े क्षेत्र में तबाही मचाने और दुश्मन के सैनिकों में खौफ पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जमीन के अंदर गहराई में स्थित लक्ष्यों तक अपनी ऊर्जा पहुंचाने में असमर्थ है क्योंकि यह लक्ष्य की सतह पर ही फट जाता है। इसके विपरीत, यदि अमेरिका को ईरान के किसी भूमिगत परमाणु संयंत्र को वास्तव में नष्ट करना है, तो उसे ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ (MOP) यानी GBU-57 जैसे अत्याधुनिक हथियारों पर निर्भर रहना होगा। ये विशेष रूप से डिजाइन किए गए बंकर-बस्टर बम होते हैं जो अत्यधिक ऊंचाई से गिराए जाने के बाद भारी गति प्राप्त करते हैं और कंक्रीट की कई परतों को पार करते हुए बंकर के भीतर जाकर विस्फोट करते हैं। इस तकनीकी अंतर के कारण ही कई सैन्य विश्लेषक यह मान रहे हैं कि केवल MOAB के भरोसे ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सामरिक अभियान चलाना अपने उद्देश्यों में विफल हो सकता है। इसके अलावा, ऐसे किसी भी कदम से क्षेत्रीय युद्ध भड़कने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है, जिससे मध्य पूर्व की स्थिरता पर गंभीर संकट आ सकता है।
ईरान की परमाणु परियोजनाएं और सैन्य अड्डे इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे साधारण हवाई हमलों और पारंपरिक विस्फोटकों को आसानी से झेल सकें। MOAB एक बेहतरीन मनोवैज्ञानिक हथियार है, लेकिन गहरे भूमिगत और कंक्रीट से ढके लक्ष्यों के खिलाफ इसकी सामरिक उपयोगिता नगण्य हो जाती है, जिसके लिए हमें पूरी तरह से अलग और विशेष बंकर-बस्टर प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य विकल्प का चयन अत्यंत सावधानी और तकनीकी आंकलन के बाद ही किया जाएगा। भले ही राजनीतिक स्तर पर कड़े संदेश देने के लिए बड़े हथियारों के इस्तेमाल की चर्चाएं आम हों, लेकिन धरातल पर वास्तविकता पूरी तरह से सामरिक और तकनीकी प्राथमिकताओं से संचालित होती है। यदि आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं और सैन्य संघर्ष की नौबत आती है, तो अमेरिकी नेतृत्व को ईरान की भूमिगत क्षमताओं को भेदने के लिए MOAB के बजाय अधिक उन्नत, सटीक और विशेष बंकर-भेदी हथियारों का ही सहारा लेना पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के सैन्य आंकलन यह दर्शाते हैं कि आधुनिक युद्धकौशल में केवल बम का आकार मायने नहीं रखता, बल्कि उसकी तकनीकी उपयुक्तता और लक्ष्य की प्रकृति का तालमेल सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। मध्य पूर्व के इस संवेदनशील भू-राजनीतिक परिदृश्य में हर एक रणनीतिक कदम के परिणाम दूरगामी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने वाले हो सकते हैं, यही वजह है कि पेंटागन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।


















