चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Medicines Become Costlier: Drug Prices Rise by Up to 17%”) महंगाई की मार झेल रही आम जनता को अब एक और बड़ा झटका लगने वाला है। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल दवाइयों की कीमतों में 8 से 17 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर उन लाखों मरीजों पर पड़ेगा जो नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करते हैं। बाजार में पहुंच रही नई खेपों में दवाइयों के दाम पहले की तुलना में काफी ज्यादा देखे जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट, समुद्री मालभाड़े में वृद्धि और आयात लागत बढ़ने के कारण दवा कंपनियों की उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है। यही वजह है कि कंपनियों ने कई महत्वपूर्ण दवाइयों की कीमतें बढ़ा दी हैं।
सबसे ज्यादा असर दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और बुखार की दवाइयों पर देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत में करीब 47 फीसदी, डाइक्लोफेनैक में 54 फीसदी, अमोक्सीसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45 फीसदी और सिप्रोफ्लोक्सासिन में 62 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सेट्रीजिन, पेनिसिलिन और कई अन्य जरूरी दवाइयों के दाम भी बढ़ गए हैं।
केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि सिरिंज, आईवी बैग, डायग्नोस्टिक किट और अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की आपूर्ति और वैश्विक हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में दवाइयों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने की मांग की है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।



















