हरियाणा। राजवीर दीक्षित
(12,000 guest teachers in have taken a major step regarding this matter) हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचर अब अपनी सेवाएं नियमित कराने की मांग को लेकर एकजुट हो गए हैं। प्रदेश के अलग-अलग गेस्ट टीचर संगठनों ने आपसी मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए एक मंच पर आने का फैसला किया है। शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांग पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
गेस्ट टीचर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान के मुताबिक, शिक्षक लगातार सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप रहे हैं। रविवार को भी कई जनप्रतिनिधियों को मांगपत्र दिए गए।
मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को सौंपे ज्ञापन
गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, कृष्ण बेदी और राजेश नाग, राज्य मंत्री गौरव गौतम सहित राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और कई विधायकों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग रखी।
शिक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा सरकार के सभी मंत्रियों और प्रदेश के विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा।
हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग
गेस्ट टीचरों की सबसे बड़ी मांग पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले को लागू करना है। शिक्षकों का दावा है कि कोर्ट ने सरकार को करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों की सेवाओं को नियमित करने के संबंध में आदेश दिए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार को अदालत के आदेश के अनुरूप जल्द प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को स्थायी भविष्य मिल सके।
2014 के वादे की भी दिलाई याद
गेस्ट टीचरों ने भाजपा के 2014 के चुनावी वादे का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि उस समय सत्ता में आने पर पहली कलम से गेस्ट टीचरों को पक्का करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी यह मांग पूरी नहीं हुई।
21 साल से सेवाएं, अब आर-पार की तैयारी
गेस्ट टीचरों का कहना है कि वे करीब 21 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनकी नौकरी को लेकर स्थायी सुरक्षा नहीं है।
अब प्रदेश के विभिन्न संगठन एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



















