टारगेट न्यूज़ विशेष कवरेज: पंजाब के बठिंडा जिले के तलवंडी साबो उपमंडल के अंतर्गत आने वाले माही नांगल गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज 23 साल के एक युवक का शव उसके ही गांव के एक जल चैनल के पास से संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया है। मृतक के हाथ में सिरिंज लगी हुई थी, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि उसकी मौत नशे की ओवरडोज के कारण हुई है। इस सनसनीखेज घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती राज्य में पैर पसार चुके ड्रग्स के काले कारोबार और युवाओं की बर्बादी के गंभीर मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया है। पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है, और वे प्रशासन तथा सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मृतक की पहचान राजप्रीत सिंह के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ महीनों से नशे की दलदल में फंस गया था और अपने पीछे एक रोता-बिलखता परिवार छोड़ गया है। इस पूरी घटना ने पंजाब की कानून व्यवस्था और नशा मुक्ति अभियानों की पोल खोलकर रख दी है, जिस पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- बठिंडा के माही नांगल गांव में 23 वर्षीय राजप्रीत सिंह का शव संदिग्ध हालत में मिला, जिसके हाथ में सिरिंज थी।
- मृतक की मां मंदीप कौर ने सरकार से वित्तीय सहायता के बजाय नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
- राजप्रीत अपने पीछे विधवा मां, पत्नी और एक साल का मासूम बेटा छोड़ गया है।
- परिजनों के अनुसार, मृतक लगभग छह महीने से नशे की लत का शिकार था और पहले नशा मुक्ति केंद्र में भी रहा था।
- क्षेत्र में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और युवाओं की लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में भारी रोष है।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय राजप्रीत सिंह शुक्रवार दोपहर से अचानक लापता हो गया था और उसका मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा था। परिजनों ने जब उसकी तलाश शुरू की, तो शुक्रवार देर रात गांव के बाहरी इलाके में एक वाटर चैनल के पास उसका शव मिला। शव मिलने की सूचना मिलते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। जब परिजनों ने मौके पर जाकर देखा, तो राजप्रीत के हाथ में सिरिंज लगी हुई थी, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि उसने कथित तौर पर ‘चिट्टा’ या किसी अन्य खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन किया था, जो उसकी जान का दुश्मन बन गया। राजप्रीत के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद संघर्षपूर्ण रही है। उसके सिर से पिता का साया कई साल पहले ही उठ चुका था। उसकी मां मंदीप कौर ने बहुत कठिनाइयों और अकेलेपन का सामना करते हुए अपने दोनों बेटों की परवरिश की थी। राजप्रीत सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और एक साल के छोटे बेटे को छोड़ गया है, जिसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। परिजनों ने बताया कि राजप्रीत कुछ महीने पहले ही ड्रग्स के जाल में फंसा था। उसे बचाने के लिए परिवार ने उसे एक नशा मुक्ति केंद्र में भी भर्ती कराया था, जहां उसने कुछ समय के लिए नशा छोड़ भी दिया था, लेकिन गत शुक्रवार को वह फिर से पुरानी संगत और लत के जाल में फंस गया, जो उसके लिए अंतिम साबित हुआ। घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। ग्रामीण खुलकर सामने आ रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि उनके गांवों में सरेआम नशीले पदार्थ बेचे जा रहे हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन इस पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। तलवंडी साबो थाने के एसएचओ, सब-इस्पेक्टर परबत सिंह ने मीडिया को बताया कि जब वह थाने पहुंचेंगे, तो इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि, पुलिस के इस प्रकार के रटे-रटाए बयानों से ग्रामीणों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि क्षेत्र में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक छोटी बच्ची को कथित तौर पर नशा करने के बाद ‘ज़ॉम्बी’ जैसी स्थिति में देखा गया था, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: मृतक राजप्रीत सिंह की मौत का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
जवाब: शुरुआती जांच और परिजनों के बiar के अनुसार, राजप्रीत की मौत ड्रग्स के अत्यधिक सेवन (ओवरडोज) के कारण हुई है, क्योंकि उसके शव के पास और हाथ में सिरिंज पाई गई है।
सवाल 2: परिवार ने सरकार से क्या मुख्य मांग रखी है?
जवाब: मृतक की मां मंदीप कौर ने सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता (जैसे 1,000 या 1,500 रुपये प्रति माह) को खारिज करते हुए मांग की है कि सरकार गांवों और शहरों में बिक रहे नशे की आपूर्ति को पूरी तरह रोके।
सवाल 3: स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
जवाब: स्थानीय पुलिस ने मामला संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों तथा नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
हम सरकार के 1,000 या 1,500 रुपये नहीं चाहते। हमारे गांवों और शहरों में बिक रहे नशे को बंद करो। हम खुद 1,000-1,500 रुपये आपस में इकट्ठा करके सरकार को दे देंगे, बस हमारे बच्चों की जिंदगी बचा लो। – मंदीप कौर, मृतक की मां
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
राजप्रीत सिंह की यह दर्दनाक मौत पंजाब में पैर पसार चुके नशा रूपी दानव की एक और भयावह तस्वीर पेश करती है। एक युवा की अर्थी उठने से न केवल एक परिवार उजड़ गया है, बल्कि एक मासूम बच्चे से उसके पिता का साया छिन गया है। मां मंदीप कौर की यह पुकार केवल एक मां का विलाप नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल है कि आखिर कब तक पंजाब के युवा इस जहरीले दलदल में अपनी जान गंवाते रहेंगे। यदि समय रहते पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक इच्छाशक्ति ने मिलकर इस ड्रग्स के नेटवर्क को जड़ से नहीं उखाड़ा, तो न जाने कितने और घर ऐसे ही वीरान होते रहेंगे। अब जरूरत सिर्फ आश्वासनों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर एक निर्णायक युद्ध की है ताकि आने वाली पीढ़ियों को बचाया जा सके।


















