चंडीगढ़ | राजवीर दीक्षित
Sweet drinking water and free electricity will be generated from the sea भारत अब समुद्री तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप में एक अत्याधुनिक हाइब्रिड प्लांट लगाया जा रहा है, जो समुद्र के पानी से पीने योग्य मीठा पानी तैयार करेगा और साथ ही 24 घंटे बिजली भी पैदा करेगा। यह परियोजना न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकती है।
यह प्लांट ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) तकनीक पर आधारित है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) द्वारा विकसित किया गया है। इस तकनीक में समुद्र की सतह के गर्म पानी को वैक्यूम में भाप में बदला जाता है, जिससे टरबाइन घूमती है और बिजली पैदा होती है। इसके बाद समुद्र की गहराई से लाए गए ठंडे पानी से भाप को ठंडा कर मीठे पानी में बदल दिया जाता है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की 1000 मीटर गहराई से ठंडा पानी लाना है। इसके लिए वैज्ञानिक 3.8 किलोमीटर लंबी और 900 मिमी व्यास वाली हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन पाइपलाइन बिछा रहे हैं। यह प्लांट रोजाना लगभग 1 लाख लीटर पीने योग्य पानी तैयार करेगा।
अब तक लक्षद्वीप के कई द्वीपों पर पानी और बिजली के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता था, जो महंगा और प्रदूषणकारी था। लेकिन इस नए प्लांट से करीब 65 मेगावाट बिजली पैदा होगी, जो द्वीपों की जरूरतों से कहीं ज्यादा है।
इस साल के अंत तक इसके शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद भारत समुद्री ऊर्जा के क्षेत्र में एक अग्रणी देश बन सकता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और जल संकट दोनों का समाधान मिलेगा।



















