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हिमाचल एंट्री टैक्स विवाद तेज: निहंग सिंहों की एंट्री, पंजाब सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम

किरतपुर साहिब-मनाली हाईवे । राजवीर दीक्षित

(Himachal Entry Tax Row Intensifies: Nihang Singhs Enter the Scene, 7-Day Ultimatum Issued to Punjab Government)हिमाचल प्रदेश के एंट्री टैक्स के खिलाफ चल रहा आंदोलन शनिवार को और तेज हो गया, जब निहंग सिंह भी इस विरोध में शामिल हो गए और पंजाब सरकार को जवाबी टैक्स लगाने के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दे दिया।

बाबा अच्चर सिंह की अगुवाई में बड़ी संख्या में निहंग सिंह गरा मोरा टोल प्लाजा पर एकत्र हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एक सप्ताह के भीतर पंजाब सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, तो वे खुद हिमाचल नंबर की गाड़ियों से टैक्स वसूलना शुरू कर देंगे।
निहंग नेताओं ने कहा कि वे हिमाचल सीमा के पास अस्थायी कैंप लगाकर वाहनों से टैक्स वसूली करेंगे, ठीक उसी तरह जैसे पंजाब की गाड़ियों पर टैक्स लगाया जा रहा है।

बाबा अच्चर सिंह ने कहा, “यह सिर्फ टैक्स का मुद्दा नहीं बल्कि पंजाब के लोगों की इज्जत और अधिकारों का सवाल है। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो हम खुद कदम उठाएंगे।” उन्होंने हिमाचल सरकार पर यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों पर बोझ डालने का आरोप लगाया।
यह बयान उस समय आया है जब दो दिन पहले श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने हिमाचल के एंट्री टैक्स को “जज़िया टैक्स” करार दिया था।

इस बीच, संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने किरतपुर–मनाली हाईवे पर धरना प्रदर्शन किया और हिमाचल सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने गरा मोरा एनएचएआई टोल प्लाजा को यात्रियों के लिए फ्री घोषित कर दिया।

संघर्ष कमेटी के नेता गौरव राणा ने कहा कि जब तक हिमाचल सरकार एंट्री टैक्स वापस लेने या पंजाब सरकार जवाबी टैक्स लगाने का स्पष्ट आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा, “टोल प्लाजा तब तक फ्री रहेगा जब तक प्रशासन स्पष्ट निर्णय नहीं लेता। लोगों पर दोनों तरफ से आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।” उन्होंने एनएचएआई पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।

हाल के हफ्तों में यह आंदोलन तेजी पकड़ रहा है, खासकर टैक्सी चालकों और छोटे ट्रांसपोर्टरों के बीच। उनका आरोप है कि हिमाचल में रजिस्टर्ड टैक्सियों को छूट दी गई है, जबकि पंजाब के कमर्शियल वाहनों से टैक्स वसूला जा रहा है, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है।

टैक्सी चालकों का कहना है कि बढ़ते खर्च के कारण उनके मुनाफे खत्म हो रहे हैं और वे कारोबार से बाहर हो रहे हैं। एक चालक ने कहा, “यात्री हिमाचल की टैक्सियों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि हमें एंट्री टैक्स के कारण ज्यादा किराया लेना पड़ता है।”
ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों ने भी पंजाब में जवाबी टैक्स सिस्टम की कमी को “एकतरफा आर्थिक बोझ” बताया है।

अब तक दोनों राज्यों की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, लेकिन निहंग सिंहों के शामिल होने और हाईवे पर असर पड़ने से आंदोलन और गंभीर हो गया है।

किरतपुर–मनाली हाईवे, जो पंजाब और हिमाचल को जोड़ने वाला अहम मार्ग है, पर भारी संख्या में पर्यटक और व्यापारिक वाहन चलते हैं।
प्रदर्शनकारियों के आगे और आंदोलन तेज करने के संकेतों के बीच, आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं |

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