श्री आनंदपुर साहिब । राजवीर दीक्षित
SGPC अधिकारियों ने हेरिटेज स्ट्रीट पर प्रस्तावित गेट का विरोध करते हुए कहा कि इससे मुख्य सड़क से तख्त श्री केशगढ़ साहिब का दृश्य बाधित होगा। उन्होंने तख्त तक जाने वाली सड़क पर सफेद संगमरमर बिछाने पर भी आपत्ति जताई और मांग की कि यह मार्ग पूरी तरह वाहनों के लिए खुला (मोटरेबल) रहना चाहिए।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि SGPC द्वारा सुझाए गए बदलावों के कारण परियोजना की मूल अवधारणा में लगभग 90 प्रतिशत तक परिवर्तन करना पड़ता। ऐसे में परियोजना का मूल स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो जाता, इसलिए इसे स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
पंजाब के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस बात की पुष्टि की कि हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना अपने मूल रूप में फिलहाल रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि विभाग अब आनंदपुर साहिब में किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार कर रहा है, संभवतः केशगढ़ साहिब और शीशगंज साहिब गुरुद्वारों को जोड़ने वाली सरकारी सड़क पर।
यह हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना अपने तरह की पहली पहल थी, जिसमें पूरे क्षेत्र को सफेद संगमरमर से विकसित कर आनंदपुर साहिब के आध्यात्मिक माहौल को और बेहतर बनाना और श्रद्धालुओं को एक सुगम अनुभव देना शामिल था। पर्यटन अधिकारियों ने इसकी तुलना अमृतसर की हेरिटेज स्ट्रीट से की थी, जिसने स्थानीय पर्यटन को काफी बढ़ावा दिया है।
SGPC ने अपने विरोध को सही ठहराते हुए कहा कि इस परियोजना से श्रद्धालुओं को असुविधा होगी।
पिछले साल 22 दिसंबर को तख्त श्री केशगढ़ साहिब के प्रबंधक ने औपचारिक रूप से सरकार से काम शुरू न करने की अपील की थी, यह कहते हुए कि इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
कार्यवाहक अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने भी इस पर चिंता जताई और कहा कि प्रस्तावित गेट तख्त के सीधे दृश्य को बाधित कर सकता है, जो सिख भावनाओं से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है।
वहीं, सरकार का कहना है कि इस परियोजना को पहले SGPC की मंजूरी मिल चुकी थी और अब इसका विरोध राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब SGPC और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, खासकर पिछले नवंबर में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को लेकर हुए विवाद के बाद।
बताया जाता है कि उस दौरान SGPC ने आनंदपुर साहिब में अपने सराय (इंस) सरकारी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध कराने से मना कर दिया था और समानांतर सरकारी आयोजनों पर भी आपत्ति जताई थी।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। हालांकि, SGPC और सरकार के बीच मतभेदों के चलते आस्था, विरासत और पर्यटन को जोड़ने वाली यह महत्वाकांक्षी हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना अब राजनीतिक विवादों में उलझकर फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।



















