। द टारगेट वेब डेस्क।
(“Is Tesla a flop in India ?) भारत में इलेक्ट्रिक कारों की तेजी से बढ़ती मांग के बीच Tesla को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल रही है। दुनिया भर में अपनी दमदार पहचान बनाने वाली इस कंपनी की भारतीय बाजार में शुरुआत काफी धीमी साबित हो रही है। पिछले 7 महीनों में कंपनी ने केवल 342 कारें बेचीं, यानी औसतन हर महीने सिर्फ 43 यूनिट्स की बिक्री हुई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच यह आंकड़ा सामने आया है, जो भारत जैसे बड़े ऑटो मार्केट के लिए काफी कम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इसी दौरान देश में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में करीब 83% की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली और सालाना बिक्री लगभग 2 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। इसके बावजूद टेस्ला इस ग्रोथ का फायदा उठाने में नाकाम रही।
इस धीमी बिक्री के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहला कारण है कीमत। Tesla Model Y की शुरुआती कीमत भारत में करीब 59.89 लाख रुपये है, जो भारी इंपोर्ट ड्यूटी के चलते काफी ज्यादा हो जाती है। यही कार अमेरिका के मुकाबले भारत में लगभग 70% महंगी पड़ती है।
दूसरा बड़ा कारण है ‘मेक इन इंडिया’ की कमी। टेस्ला फिलहाल अपनी गाड़ियां चीन के शंघाई प्लांट से इंपोर्ट कर रही है, जिससे लागत बढ़ रही है। वहीं, भारतीय सड़कों और नियमों के हिसाब से भी चुनौतियां हैं। कंपनी का ‘फुली सेल्फ ड्राइविंग’ फीचर भारत में अनुमति नहीं रखता और कार की ग्राउंड क्लीयरेंस भी भारतीय सड़कों के लिए कम मानी जा रही है।
इसके अलावा, टेस्ला के पास भारत में फिलहाल सिर्फ एक ही मॉडल है, जबकि अन्य कंपनियां सस्ते और ज्यादा विकल्प दे रही हैं। ऐसे में जब तक टेस्ला भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर कीमतें कम नहीं करती, तब तक इसे मास मार्केट में पकड़ बनाना मुश्किल ही रहेगा।



















