Home Chandigarh LPG संकट खत्म करने की तैयारी: 2,500 KM पाइपलाइन प्रोजेक्ट मंजूर

LPG संकट खत्म करने की तैयारी: 2,500 KM पाइपलाइन प्रोजेक्ट मंजूर

चंडीगढ़ | राजवीर दीक्षित

(“Preparing to end the LPG crisis: 2,500 km pipeline project approved.”) मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जहां दुनिया भर में रसोई गैस और ईंधन की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) ने देश में एलपीजी सप्लाई को मजबूत बनाने के लिए 2,500 किलोमीटर लंबी चार नई पाइपलाइन बिछाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब ₹12,500 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

वर्तमान में एलपीजी की ढुलाई रिफाइनरी से बॉटलिंग प्लांट तक ट्रकों और टैंकरों के जरिए सड़कों से की जाती है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है और लागत भी अधिक आती है। लेकिन पाइपलाइन बनने के बाद यह प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और किफायती हो जाएगी। साथ ही, ट्रकों की संख्या कम होने से प्रदूषण में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक कदम होगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत चार प्रमुख रूट तय किए गए हैं—चेरलापल्ली से नागपुर, शिक्रापुर-हुबली से गोवा, पारादीप से रायपुर और झांसी से सितारगंज। इन पाइपलाइनों के जरिए गैस सीधे बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचेगी, जिससे सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनेगी।

सबसे खास बात यह है कि ये पाइपलाइनें केवल ट्रांसपोर्ट का माध्यम नहीं होंगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में स्टोरेज का भी काम करेंगी। अगर किसी कारण से विदेशों से एलपीजी की सप्लाई बाधित होती है, तो इन पाइपलाइनों में उपलब्ध गैस देश की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में यह प्रोजेक्ट देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे आम लोगों को सस्ती और सुचारु गैस सप्लाई मिलने की उम्मीद है।

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