चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Milk Packets Will Now Turn Into Soil! Mother Dairy Launches a Unique Eco-Friendly Initiative”) विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) से पहले मदर डेयरी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी ने भारत का पहला ‘नेचुरली डिग्रेडेबल’ यानी प्राकृतिक रूप से गलने वाला दूध का पाउच लॉन्च करने की घोषणा की है। इस नई तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इस्तेमाल के बाद फेंका गया यह पैकेट 2 से 3 साल के भीतर खुद-ब-खुद मिट्टी में मिल जाएगा, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
मदर डेयरी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अनुसार, 5 जून 2026 से दिल्ली-एनसीआर में इस विशेष पाउच की सप्लाई शुरू की जाएगी। शुरुआत में गाय का दूध इस पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग में उपलब्ध होगा और बाद में अन्य दूध उत्पादों को भी इसी तकनीक के तहत बाजार में उतारा जाएगा।
कंपनी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने स्पष्ट किया है कि नई पैकेजिंग की लागत पारंपरिक प्लास्टिक पाउच से अधिक होने के बावजूद उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। यानी दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां सामान्य प्लास्टिक को खत्म होने में सैकड़ों या हजारों साल लग जाते हैं, वहीं यह नया पाउच पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाएगा।
इस अभिनव तकनीक को विकसित करने में चार साल से अधिक का समय लगा है। इसके लिए दुनिया भर के कई शोध संस्थानों का सहयोग लिया गया। खास बात यह है कि मदर डेयरी ने इस तकनीक का पेटेंट भी नहीं कराया, ताकि अन्य कंपनियां भी इसे अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।
1974 में ऑपरेशन फ्लड के तहत स्थापित मदर डेयरी की यह पहल भारत में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में प्लास्टिक कचरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



















