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ड्रग तस्करों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- वे देश के युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“Supreme Court Takes Strict Stand Against Drug Traffickers, Says They Are Ruining the Lives of the Nation’s Youth”) देश में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने नशीले पदार्थों से जुड़े एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ड्रग्स के कारोबार से जुड़े लोगों के साथ बेहद सख्ती से निपटने की जरूरत है, क्योंकि वे देश के युवाओं का भविष्य और आने वाली पीढ़ियों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस शील नागू और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज मामले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। आरोपी को जून 2022 में गिरफ्तार किया गया था और उसने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि आरोपी की यह लगातार छठी जमानत याचिका थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 11 जून 2022 को आरोपी और उसके दो साथी एक बैग के साथ खड़े थे। पुलिस को देखकर उन्होंने भागने की कोशिश की। जांच के दौरान बैग से करीब 10.15 ग्राम वजन की 21 एमडीएमए (MDMA) गोलियां बरामद की गईं। यह एक प्रतिबंधित और खतरनाक सिंथेटिक ड्रग मानी जाती है।

मामले में आरोपी के वकील ने दलील दी कि नवंबर 2024 में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक मुकदमा पूरा नहीं हुआ है। साथ ही सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और जमानत देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि युवाओं को बर्बाद करने वाले ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कानून को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए।

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