चंडीगढ़/मोरिंडा । राजवीर दीक्षित
(Major Political Upset in Morinda Municipal Council: AAP, Despite Winning Just One Seat, Secures President’s Post; Channi Alleges Misuse of Power.) मोहाली। मोरींडा नगर परिषद (एमसी) के अध्यक्ष पद के चुनाव में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। नगर परिषद चुनाव में केवल एक सीट जीतने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने चार निर्दलीय पार्षदों और कांग्रेस के तीन बागी पार्षदों के समर्थन से अपना अध्यक्ष चुनवा लिया। निर्दलीय पार्षद जलपाल सिंह जॉली, जो बाद में AAP में शामिल हो गए थे, नगर परिषद के नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
गौरतलब है कि मोरींडा नगर परिषद के 15 वार्डों में कांग्रेस ने 10 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था, जबकि चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार और केवल एक सीट पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। इसके बावजूद AAP ने समर्थन जुटाकर अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया।
अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले मोरींडा में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पुलिस पर कांग्रेस समर्थक पार्षदों को हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए मोरींडा पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। चन्नी बड़ी संख्या में समर्थकों और निर्वाचित पार्षदों के साथ पुलिस थाने पहुंचे और आरोप लगाया कि कांग्रेस के तीन पार्षदों को चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया।
चन्नी ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए एक पार्षद को पुलिस थाने के बाथरूम में बंद कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पार्षदों को मतदान में भाग लेने से रोकने के लिए कार्रवाई की और सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग किया। बाद में चन्नी अपने पार्टी पार्षदों के साथ नगर परिषद कार्यालय भी पहुंचे और आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों को मतदान के लिए सदन में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को कुचला गया है और जनता द्वारा दिए गए जनादेश से समझौता किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने सत्ता का खुला दुरुपयोग किया है।
हिरासत में लिए गए पार्षदों के समर्थन में अन्य निर्वाचित पार्षद भी पुलिस थाने पहुंचे। प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन पर दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। उनका कहना था कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्य से की गई ताकि अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले नगर परिषद के समीकरण बदले जा सकें। इस दौरान पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठाई गई।
पुलिस थाने के बाहर हुए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया। विपक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से चन्नी के आरोपों या पार्षदों को कथित रूप से हिरासत में लेने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
कड़े सुरक्षा इंतजामों और भारी राजनीतिक तनाव के बीच मोरींडा नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न हुआ, जहां दोनों पक्षों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप एक-दूसरे पर लगाए।



















