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सरकार की सख्ती: अब इन दवाइयों की बिक्री के लिए लाइसेंस और डॉक्टर की पर्ची होगी अनिवार्य

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“Government Tightens Rules: License and Doctor’s Prescription Now Mandatory for Sale of These Medicines “) केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली दवाइयों की बिक्री और खरीद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐसी दवाइयों को अब लाइसेंस छूट की श्रेणी से बाहर कर दिया है। नए नियमों के अनुसार, इन दवाइयों की बिक्री केवल वैध लाइसेंस के तहत ही होगी और इन्हें खरीदने के लिए पंजीकृत डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) अनिवार्य होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कुछ दवाइयों में एथाइल अल्कोहल की मात्रा 80 से 90 प्रतिशत तक पाई गई है, जिसके कारण इनके दुरुपयोग और नशे के लिए इस्तेमाल होने की शिकायतें कई राज्यों से सामने आई थीं। इसी को देखते हुए सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए इन दवाइयों को सख्त नियामक निगरानी के दायरे में लाने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत 30 मिलीलीटर से अधिक मात्रा वाली और 12 प्रतिशत से ज्यादा एथाइल अल्कोहल युक्त सभी दवाइयों को अब शेड्यूल K के तहत मिलने वाली लाइसेंस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही इन्हें शेड्यूल H1 में शामिल किया गया है, जिससे इनकी बिक्री केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही संभव होगी। मेडिकल स्टोर संचालकों को इन दवाइयों की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।

सरकार का कहना है कि इस कदम से अल्कोहल युक्त दवाइयों के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी और ये केवल वास्तविक चिकित्सा जरूरत वाले मरीजों तक ही पहुंचेंगी। पहले इलायची, अदरक और अन्य मसालों से बनी कुछ दवाइयों को विशेष छूट प्राप्त थी, लेकिन अब केवल इसी आधार पर अधिक अल्कोहल वाली दवाइयों को छूट नहीं मिलेगी। सरकार का उद्देश्य सभी अल्कोहल युक्त दवाइयों के लिए एक समान और पारदर्शी नियामक व्यवस्था लागू करना है, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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