चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Caps Private School Fee Hike at 5% “) पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर आखिरकार सरकार ने बड़ी कार्रवाई कर दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नया अध्यादेश लागू हो गया है, जिसके तहत अब कोई भी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत देने के लिए उठाया गया है।
सरकार का कहना है कि पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों द्वारा हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। पुराने नियमों की कमियों का फायदा उठाकर कई संस्थान जरूरत से ज्यादा फीस वसूल रहे थे। अब नए अध्यादेश के लागू होने के बाद ट्यूशन फीस के साथ-साथ बिल्डिंग फंड, डेवलपमेंट फंड और अन्य अनिवार्य शुल्कों को मिलाकर कुल बढ़ोतरी भी 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी।
यदि कोई स्कूल विशेष परिस्थितियों में 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे कम से कम छह महीने पहले सरकार द्वारा गठित समिति के पास आवेदन देना होगा। समिति स्कूल का वित्तीय ऑडिट और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। केवल आवेदन देने से फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अध्यादेश लागू होने के बाद पिछले 36 महीनों में निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर उनकी मान्यता या पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
यह नया कानून पंजाब के सभी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू होगा, चाहे वे PSEB, CBSE, ICSE या किसी अन्य शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हों। सरकार का दावा है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



















