चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Birth Certificate Crisis: Thousands of Students Face Admission Trouble “) पंजाब में शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के बाद हजारों छात्र मुश्किल में फंस गए हैं। वजह यह है कि उनके जन्म प्रमाणपत्र में उनके नाम की जगह केवल “लड़का” या “लड़की” दर्ज है। अब 14 वर्ष से अधिक आयु होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल पोर्टल पर नाम जोड़ने का विकल्प भी बंद हो चुका है, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
ऐसा ही मामला जगजीत सिंह का है, जिसकी जन्मतिथि 28 अक्टूबर 2010 है। वह दसवीं कक्षा में दाखिला लेना चाहता है, लेकिन उसके डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र में नाम दर्ज नहीं है। इसी तरह नंदिनी समेत कई अन्य छात्र भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जन्म के समय अस्पतालों ने बच्चे का नाम दर्ज करने के बजाय केवल “लड़का” या “लड़की” लिखकर पंजीकरण कर दिया था। अब जब बच्चे उच्च कक्षाओं में प्रवेश लेने की उम्र में पहुंचे हैं तो उन्हें नाम दर्ज कराने की अनुमति नहीं मिल रही।
जानकारी के अनुसार, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की धारा 14 के तहत 14 वर्ष की आयु तक नाम दर्ज कराया जा सकता है, लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर यह सुविधा बंद हो जाती है। सेवा केंद्रों का भी कहना है कि पोर्टल बंद होने के कारण वे आवेदन स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
इस समस्या का सबसे अधिक असर आठवीं, दसवीं और बारहवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए प्रवेश लेने वाले छात्रों पर पड़ रहा है। अभिभावकों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि 14 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों के लिए भी पोर्टल दोबारा खोला जाए और आधार कार्ड व स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया आसान बनाई जाए, ताकि हजारों छात्रों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित रह सके।



















