चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
(Akal Takht Issues Major Directive: Appeals to Gurudwaras to Stop Yoga Programs; Jathedar Gaggarj Says Yoga Has No Place in Sikhism) श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार गियानी कुलदीप सिंह गड़गज ने स्पष्ट किया है कि सिख धर्म में योग का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सभी गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों से अपील की है कि गुरुद्वारों के परिसर, लंगर हॉल और दीवान हॉल में किसी भी प्रकार के योग कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं।
मंजी साहिब दीवान हॉल में संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार गड़गज ने कहा कि हाल ही में कुछ सिख युवाओं ने शिकायत की थी कि कुछ गुरुद्वारों में योग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लोगों से विभिन्न आसन और प्राणायाम करवाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि योग का शाब्दिक अर्थ ईश्वर से जुड़ना है, लेकिन आज जो योग प्रचलित है, वह मुख्य रूप से शारीरिक व्यायाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति घर पर व्यायाम करना चाहता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गुरुद्वारों के भीतर योग कराना सिख मर्यादा और गुरु साहिबान की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है।

जत्थेदार ने कहा कि गुरुद्वारों की स्थापना इस उद्देश्य से हुई है कि श्रद्धालु गुरबाणी और शब्द से जुड़ें। उन्होंने कहा कि एक सिख के लिए गुरबाणी से बढ़कर कुछ भी नहीं है और गुरुद्वारे योग अभ्यास का स्थान नहीं बन सकते।
उन्होंने मीरी-पीरी की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु साहिब ने सिखों को आध्यात्मिकता के साथ-साथ शस्त्र विद्या का भी संदेश दिया है। गुरुद्वारों में योग को बढ़ावा देना गुरु की शिक्षाओं के विपरीत है।
जत्थेदार गड़गज ने सिख संगत और सभी गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों से आग्रह किया कि जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब सुशोभित हैं, वहां केवल गुरबाणी और सिख धार्मिक परंपराओं पर ही ध्यान केंद्रित रखा जाए। उन्होंने दोहराया कि शारीरिक व्यायाम घर पर किया जा सकता है, लेकिन गुरुद्वारों में योग कार्यक्रमों की अनुमति देना गुरु के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।



















