चंडीगढ़/नंगल । राजवीर दीक्षित
(Monsoon departs, Bhakra-Pong water table is worrying! Water levels have dropped significantly compared to last year) उत्तर भारत के प्रमुख जलाशय अब मानसून के बाद के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। 15 सितंबर को जलाशयों का वार्षिक भराव सीजन आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया। इसके साथ ही भाखड़ा और पोंग जलाशयों के ताजा आंकड़ों ने पिछले साल की तुलना में पानी की उपलब्धता में बड़ा अंतर सामने रखा है। हालांकि, भंडारण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे फिलहाल सीधे तौर पर जल संकट नहीं माना जा रहा है।
भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 15 सितंबर को 1,644.47 फीट दर्ज किया गया। यह इसके 1,680 फीट के पूर्ण जलाशय स्तर से करीब 35.5 फीट नीचे है। जलाशय में इस समय 4.03 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) लाइव स्टोरेज मौजूद है, जो इसकी कुल लाइव क्षमता का लगभग 71 प्रतिशत है।
वहीं पोंग जलाशय का जलस्तर 1,372.37 फीट रहा। यह 1,390 फीट के संशोधित पूर्ण जलाशय स्तर से करीब 17.6 फीट नीचे है। पोंग में 4.54 BCM लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया, जो लगभग 79 प्रतिशत क्षमता के बराबर है।
पिछले साल की स्थिति से तुलना करें तो तस्वीर काफी अलग थी। 15 सितंबर 2025 को भाखड़ा का स्तर 1,676.16 फीट था और यह करीब 97 प्रतिशत भरा हुआ था। वहीं पोंग का जलस्तर 1,392.48 फीट था और लाइव स्टोरेज 103 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यानी इस साल भाखड़ा करीब 32 फीट नीचे, जबकि पोंग 20 फीट से ज्यादा नीचे है।
पानी की आवक में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। 21 मई से शुरू हुए भराव सीजन के दौरान भाखड़ा में कुल 9.22 BCM पानी आया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 13.60 BCM था। पोंग में इस साल 5.95 BCM की आवक हुई, जबकि 2025 में यह 14.01 BCM थी।
रंजीत सागर बांध में भी आवक पिछले साल की तुलना में कम रही। यहां पानी की आवक 6,292 क्यूसेक दर्ज हुई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 18,547 क्यूसेक थी।
BBMB सूत्रों के अनुसार, इस साल की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर जरूर है, लेकिन भाखड़ा और पोंग में अभी भी पर्याप्त लाइव स्टोरेज मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो दशकों में इन जलाशयों के जलस्तर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि जलाशयों में पानी की स्थिति फिलहाल संभली हुई है, लेकिन मानसून की अनिश्चित और बदलती प्रकृति ने उत्तर भारत के जल संसाधनों के सामने नई चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।



















