धर्मशाला। राजवीर दीक्षित
(Kangra Court Grants Bail in Minor Girl Case) हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नाबालिग से जुड़े एक मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान, पुलिस जांच की स्थिति और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानती के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ रह रही है और उससे शादी करना चाहती है। पीड़िता ने आरोपी की जमानत का विरोध भी नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता के बयान को मामले के अन्य तथ्यों के साथ ध्यान में रखा गया है।
अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि यह मामला अस्पताल से मिली रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर ली है और संबंधित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी है। कोर्ट ने माना कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी को लगातार न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं प्रतीत होता। इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार करने का निर्णय लिया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पीड़िता गर्भवती है। अदालत ने माना कि ऐसी परिस्थिति में उसे अपने परिवार और आसपास के लोगों के सहयोग की आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि मामले के सभी तथ्यों, पीड़िता की वर्तमान स्थिति और जांच की प्रगति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दी जा रही है।
हालांकि अदालत ने आरोपी पर कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेगा। उसे अदालत द्वारा तय प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपी को दोषमुक्त घोषित करना नहीं है।
मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और अंतिम निर्णय अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सुनाया जाएगा।



















