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IIT मंडी में ‘पहले दोस्ती, फिर ठगी’ का खेल! 15 लाख की स्पांसरशिप से शुरू हुई कहानी

मंडी । राजवीर दीक्षित

(‘Friendship first, then fraud’ at IIT Mandi! The story began with a ₹15 lakh sponsorship) IIT मंडी की चमक-दमक के पीछे कथित ठगी का बड़ा खेल! ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपित गौरव अनिल धोते ने कथित तौर पर संस्थान की साख को ही अपने लिए भरोसे का हथियार बना लिया। अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में 15 लाख रुपये की स्पॉन्सरशिप देकर उसने संस्थान के निदेशक से नजदीकी बनाई। इसके बाद प्रोफेसरों, कर्मचारियों और स्थानीय कारोबारियों तक अपनी पहुंच बनाई और लोगों का भरोसा जीतकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये का जाल बिछाया। जिस नाम पर लोगों ने भरोसा किया, वही नाम कथित तौर पर ठगी के खेल का सबसे बड़ा सहारा बन गया।
जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र निवासी आरोपित गौरव अनिल धोते और आइआइटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के बीच पुराना संपर्क था। दोनों की जान-पहचान उस दौर की बताई जा रही है, जब प्रो. बेहरा आइआइटी कानपुर में कार्यरत थे। आरोप है कि बाद में इसी संपर्क का इस्तेमाल गौरव ने मंडी में अपने प्रभाव और पहुंच को बढ़ाने के लिए किया।

दफ्तर चमकदार, दस्तावेज आकर्षक और वादे बड़े

निवेशकों का विश्वास हासिल करने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर ‘सेराफिना’ नाम से कई फर्जी कंपनियां संचालित कर रखी थीं। चमकदार कार्यालयों और दस्तावेजों के जरिए ऐसा माहौल तैयार किया जाता था, जिससे निवेशकों को कंपनी पर भरोसा हो सके। इसके बाद हर महीने 5 से 10 प्रतिशत ब्याज और तीन साल में निवेश दोगुना करने का लालच दिया जाता था।

कमांद में खोला गया कार्यालय भी इसी नेटवर्क का हिस्सा बताया गया। आरोपी की संस्थान के निदेशक से नजदीकी ने उसके प्रभाव को और मजबूत किया। मंच साझा करने से लेकर IIT के गेस्ट हाउस में करीब तीन महीने ठहरने तक, उसकी संस्थान में मौजूदगी ने लोगों के बीच उसकी विश्वसनीयता बढ़ाई। कई फैकल्टी और अन्य लोगों ने इसी भरोसे के आधार पर निवेश किया।

सवा 4 करोड़ की शिकायतें, 40 करोड़ तक पहुंच सकती है ठगी! आरोपी नेपाल फरार

पद्धर में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर हुई कथित ठगी का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है। पुलिस के पास अब तक सवा चार करोड़ रुपये से ज्यादा की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आशंका है कि जांच में नए पीड़ित सामने आने के बाद यह आंकड़ा 40 करोड़ रुपये के पार जा सकता है।
आरोपी अनिल पर कानपुर और गोवा में भी इसी तरह ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए लोगों से ठगी करने के आरोप लगे हैं। जुलाई में पीड़ितों को रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में आरोपी के नेपाल भाग जाने की बात सामने आई।

गौरव धोते के कथित निवेश घोटाले पर IIT का स्पष्टीकरण, ‘हमारा कोई लेना-देना नहीं’

कथित निवेश घोटाले में नाम सामने आने के बाद IIT ने पूरे मामले से दूरी स्पष्ट कर दी है। रजिस्ट्रार कुमार एस. पांडे के मुताबिक, गौरव अनिल धोते ने संस्थान से केवल स्टार्टअप इनक्यूबेशन सहायता के संबंध में संपर्क किया था।
संस्थान की ओर से उन्हें सामान्य स्तर पर मार्गदर्शन दिया गया था। IIT ने साफ कहा कि किसी भी तरह की वित्तीय गतिविधि या निवेश के लिए संस्थान ने धोते अथवा किसी अन्य व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया था। पुलिस द्वारा की जा रही जांच में संस्थान आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर सहयोग कर रहा है।

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