नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित
(Tata Sons Chairman N. Chandrasekaran Resigns, Tenure to Continue Until February) टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि वह भारत के करीब 400 अरब डॉलर के टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने यह जानकारी दी है। संवेदनशीलता के कारण सूत्र ने अपनी पहचान उजागर नहीं की। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी तक है।
टाटा संस इस समूह की 30 से अधिक कंपनियों को नियंत्रित करती है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा मोटर्स और एयर इंडिया शामिल हैं। वहीं, टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स की है, जो समूह की परोपकारी संस्था है। रॉयटर्स की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में टाटा संस ने चंद्रशेखरन को चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्त करने पर फैसला टाल दिया था। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने उनके पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव का विरोध किया था। सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा कुछ शर्तें चाहते थे। इनमें यह प्रतिबद्धता भी शामिल थी कि टाटा संस को कभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।
हालांकि, चंद्रशेखरन इस प्रतिबद्धता के लिए तैयार नहीं थे। दोनों पक्षों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर भी मतभेद सामने आए थे। टाटा संस ने रॉयटर्स की टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया। वहीं, चंद्रशेखरन से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। 2009 में वह TCS के CEO बने और 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला। पिछले एक साल में टाटा समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें एक घातक विमान हादसे के बाद एयर इंडिया पर नियामकीय जांच, TCS पर कीमतों का दबाव और Jaguar Land Rover पर हुआ साइबर हमला शामिल है। साइबर हमले के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और ब्रिटेन की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा।
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पहले भी समूह को प्रभावित कर चुके हैं
सबसे चर्चित मामला 2016 का था, जब कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर समूह के तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच विवाद के बाद टाटा संस के बोर्ड ने मिस्त्री को पद से हटा दिया था। इसके बाद कई वर्षों तक चलने वाली कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी।



















