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हिमाचल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के लिए डिजिटल हाजिरी अनिवार्य, ‘हिम उपस्थिति’ ऐप से होगी लोकेशन ट्रैकिंग

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Himachal Govt Makes Digital Attendance Mandatory for Doctors & Hospital Staff, ‘Him Upasthiti’ App Launched) हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आउटसोर्स कर्मचारियों और प्रशिक्षु चिकित्सकों को केवल अस्पताल पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अपनी सटीक लोकेशन के साथ डिजिटल उपस्थिति भी दर्ज करनी होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने ‘हिम उपस्थिति’ (Him Upasthiti) ऐप लागू कर दिया है।

नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों को इस ऐप के माध्यम से अपनी हाजिरी दर्ज करनी होगी। अस्पताल पहुंचने के बाद कर्मचारियों को ऐप पर अपनी वर्तमान लोकेशन साझा करनी होगी और यह भी बताना होगा कि वे किस विभाग या किस फ्लोर पर कार्य कर रहे हैं। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित कार्यस्थल से बाहर पाया जाता है, तो उसकी उपस्थिति स्वतः निरस्त होने की संभावना रहेगी। इससे ड्यूटी के दौरान लापरवाही और अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारी जल्द से जल्द ऐप डाउनलोड कर आधार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करें। इस ऐप को आधार से जोड़ने का उद्देश्य उपस्थिति प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी हाजिरी जैसी समस्याओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

इस नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। अब उनकी उपस्थिति भी डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी, जिससे कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और सभी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।

इसके साथ ही हिमाचल सरकार ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती की नीति में भी बदलाव करने का फैसला लिया है। अब जिन मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की संख्या अधिक होगी, वहां अतिरिक्त डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। वहीं, जहां मरीजों की संख्या कम होगी, वहां आवश्यकता के अनुसार ही स्टाफ रखा जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से अस्पतालों में कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह कदम राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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