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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के अधिकार को माना, कहा- बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि

दिल्ली। राजवीर दीक्षित

(Supreme Court upholds tribunal’s authority; states dignity and safety of the elderly are paramount) सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक अपनी गरिमा, सुरक्षा और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए बच्चों को अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान के साथ जीवन जीना नहीं है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बाहर करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।

बुजुर्गों की गरिमा के लिए बेदखली का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षित जीवन देना भी है। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कितना सम्मानजनक व्यवहार करता है।

81 वर्षीय मां को वृद्धाश्रम जाना पड़ा

यह मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील से जुड़ा था। गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन किया था। यह मकान गुप्ता की स्वयं अर्जित संपत्ति थी। मामला तब गंभीर हुआ, जब उनकी 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद उपजिलाधिकारी ने 15 नवंबर 2022 को बेटे को मकान से बाहर करने का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इस आदेश को बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश किया था रद्द

बेटे और बहू ने उपजिलाधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि वर्ष 2007 का वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही नहीं माना। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, भरण-पोषण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण से जुड़े कानून की धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल को अपने उद्देश्य को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति हासिल है।

कानून का मकसद सिर्फ गुजारा भत्ता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े कानून को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। यदि किसी बुजुर्ग को अपनी ही संपत्ति में रहने के दौरान अपमान, असुरक्षा या उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, तो उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल उचित कार्रवाई कर सकता है। इस फैसले को बुजुर्ग माता-पिता के सम्मान, सुरक्षा और संपत्ति संबंधी अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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