हिमाचल। राजवीर दीक्षित
(Himachal on alert following devastation in Nepal; concerns rise over Chenab-Beas link)नेपाल की आपदा के बाद अब हिमाचल में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास नदी लिंक प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लाहौल, कुल्लू-मनाली और मंडी के लोगों को डर है कि ब्यास बेसिन में पानी का रुख बदलने से पहले से ही नाजुक हिमालयी इलाकों पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
पीर पंजाल रेंज के नीचे बनने वाली करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग इस ₹2,356 करोड़ के प्रोजेक्ट की सबसे अहम कड़ी है। योजना के मुताबिक चंद्रा नदी का पानी ब्यास नदी में मोड़ा जाएगा और इससे लगभग 4,000 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है। हालांकि, खराब मौसम, भूस्खलन और बाढ़ के लगातार खतरे के बीच परियोजना की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव पर नए सिरे से समीक्षा की मांग की जा रही है।
नेपाल में आई तबाही ने हिमाचल के ब्यास बेसिन के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कारगिल युद्ध के हीरो रिटायर्ड ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि लाहौल से लेकर कुल्लू-मनाली और मंडी तक लोगों के मन में अब एक नया डर पैदा हो गया है।उन्हें आशंका है कि जिस प्रोजेक्ट को विकास की उम्मीद माना जा रहा है, वही किसी आपदा की स्थिति में बड़ी चुनौती बन सकता है। सवाल अब सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा का भी है।
ब्रिगेडियर ठाकुर ने ब्यास नदी से पैदा हो रहे खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हाल के वर्षों में भारी बारिश के दौरान ब्यास ने जमकर तबाही मचाई, जिससे कृषि और बागवानी भूमि के अलावा घरों और कारोबारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा।
उन्होंने कहा कि कुल्लू-मनाली से लेकर मंडी तक ब्यास के किनारे रहने वाले लोगों के लिए नदी लगातार मुसीबत का कारण बन रही है। ऐसे हालात में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को लागू करने से पहले सरकारों को इसके सुरक्षा पहलुओं पर दोबारा विचार करना चाहिए।
प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए परियोजना की व्यवहार्यता के साथ जनसुरक्षा का आकलन भी जरूरी है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा से समझौता करके विकास की योजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
मनाली के होटल मालिक अनूप ठाकुर ने प्रस्तावित डायवर्जन का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ब्यास नदी से जुड़ी समस्याएं अभी तक हल नहीं हुई हैं और हर मॉनसून में नदी के उफान से इलाके में भारी नुकसान होता है। उनका कहना है कि लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए।
मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने भी प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुल्लू के लोग भारी बारिश के दौरान इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। गौड़ के मुताबिक, ब्यास नदी पहले ही बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान कर चुकी है और इसमें चंद्रा नदी का पानी मिलाने से खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाने का आग्रह करेंगे। वहीं, स्थानीय लोग निर्माण शुरू होने से पहले प्रोजेक्ट की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों की व्यापक समीक्षा की मांग कर रहे हैं।



















