चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Political upheaval in AAP: New in-charges appointed for five MLAs’ constituencies—will tickets be changed?) पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने अभी से संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने मई से अब तक 14 विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उन पांच सीटों की हो रही है, जहां पहले से AAP के विधायक मौजूद हैं।
सिटिंग विधायकों के रहते नए हलका इंचार्ज की नियुक्ति ने स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठ रहा है कि 2027 में टिकट मौजूदा विधायक को मिलेगा या नए हलका इंचार्ज को?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान ने ऐसे विधानसभा क्षेत्रों की सूची तैयार की है, जहां आने वाले समय में विधायकों के साथ संगठन को मजबूत करने के लिए नए हलका इंचार्ज लगाए जा सकते हैं।
इन 5 सीटों पर सबसे ज्यादा चर्चा
खरड़: AAP की मौजूदा विधायक अनमोल गगन मान के क्षेत्र में पार्टी ने परमिंदर सिंह गोल्डी को हलका इंचार्ज बनाया है। अनमोल गगन मान सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। नए इंचार्ज की नियुक्ति के बाद क्षेत्र में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
चमकौर साहिब: इस आरक्षित सीट से AAP विधायक डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी हैं। पार्टी ने यहां जसबीर सिंह गढ़ी को हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी दी है। इसके बाद क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी है।
पट्टी: विधायक लालजीत सिंह भुल्लर के विधानसभा क्षेत्र में जसकंवर सिंह गिल उर्फ जस्सा गिल को हलका इंचार्ज नियुक्त किया गया है। भुल्लर सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
बठिंडा रूरल: विधायक अमित रतन कोटफत्ता के क्षेत्र में पार्टी ने गोपाल सिंह को हलका इंचार्ज बनाया है। पार्टी के इस कदम को क्षेत्र में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अमृतसर नॉर्थ: यहां AAP विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह हैं। पार्टी ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन कर्मजीत सिंह रिंटू को हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी दी है। विधायक के रहते नई नियुक्ति ने इस सीट को भी चर्चा में ला दिया है।
क्या नए इंचार्ज टिकट के दावेदार होंगे?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सिटिंग विधायक के रहते किसी दूसरे नेता को हलका इंचार्ज बनाना सामान्य संगठनात्मक नियुक्ति से अलग संदेश दे सकता है। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद बातिश के अनुसार, अगर पार्टी किसी विधायक के क्षेत्र में नया इंचार्ज नियुक्त करती है तो यह आगामी चुनाव के लिए संभावित विकल्प तैयार करने की रणनीति हो सकती है।
उनके मुताबिक, हलका इंचार्ज को संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे काम करने का मौका मिलता है। ऐसे में चुनाव तक वह अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार कर सकता है और टिकट का मजबूत दावेदार बन सकता है।
हालांकि, हलका इंचार्ज बनाया जाना अपने आप में टिकट मिलने की गारंटी नहीं है। अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा।
बाकी विधायकों को भी संदेश
विश्लेषकों का मानना है कि इन पांच सीटों पर नियुक्तियां केवल संबंधित विधायकों तक सीमित संदेश नहीं हैं। इससे पार्टी के बाकी विधायकों को भी संकेत मिल सकता है कि उनके कामकाज, जनता में पकड़ और संगठन के साथ तालमेल पर हाईकमान की नजर है।
अगर किसी क्षेत्र में पार्टी को विधायक की स्थिति कमजोर लगती है तो भविष्य में वहां भी वैकल्पिक नेतृत्व तैयार किया जा सकता है।
इंटरनल सर्वे भी हो सकता है अहम फैक्टर
राजनीतिक विश्लेषक वैवस्वत वैंकट के अनुसार, AAP चुनावी रणनीति में संगठनात्मक प्रयोग करती रही है। सिटिंग विधायक के साथ हलका इंचार्ज की नियुक्ति को पार्टी की संभावित इलेक्शन स्ट्रैटेजी और आंतरिक फीडबैक से जोड़कर देखा जा सकता है।
अगर पार्टी के आंतरिक आकलन में किसी विधायक के खिलाफ नाराजगी या कमजोरी सामने आती है तो नए नेता को समय रहते क्षेत्र में सक्रिय करने से चुनाव तक विकल्प तैयार किया जा सकता है।
कार्यकर्ताओं के सामने नई उलझन
पार्टी की इस रणनीति से सबसे ज्यादा असमंजस स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच पैदा होने की बात कही जा रही है। कार्यकर्ताओं के सामने सवाल है कि स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और पार्टी से जुड़े मामलों के लिए वे सिटिंग विधायक के पास जाएं या नए हलका इंचार्ज के पास।
राजनीतिक विश्लेषक पवनदीप शर्मा के मुताबिक, इससे स्थानीय स्तर पर दो राजनीतिक केंद्र बनने की स्थिति पैदा हो सकती है। विधायक और इंचार्ज के समर्थकों के बीच तालमेल नहीं बैठा तो गुटबाजी भी बढ़ सकती है।
2027 से पहले AAP की तैयारी तेज
AAP की ओर से 14 विधानसभा क्षेत्रों में हलका इंचार्ज नियुक्त किए जाने से साफ है कि पार्टी 2027 के चुनाव की तैयारियों को अभी से गति दे रही है। खास तौर पर सिटिंग विधायकों वाले पांच क्षेत्रों में नए चेहरों की एंट्री ने टिकट को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।
अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में इन नए हलका इंचार्ज को कितनी राजनीतिक जिम्मेदारी मिलती है और 2027 के टिकट बंटवारे में पार्टी इन नियुक्तियों को किस तरह इस्तेमाल करती है।



















