शिमला । राजवीर दीक्षित
(Uproar on the final day of the Himachal Assembly session; government and opposition clash over the ₹1,500 crore issue)हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया। दसवीं बैठक की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जिसमें विधायकों ने सरकार से 92 सवालों के जवाब मांगे। इनमें 50 तारांकित प्रश्नों पर सदन में मौखिक जवाब होंगे, जबकि 42 अतारांकित सवालों के लिखित जवाब पेश किए जाएंगे।
विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सदन में प्रदेश से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई। सड़क और बिजली से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, सरकारी भर्तियों और आपदा राहत तक के विषय उठाए गए।
कर्मचारियों के मुद्दे भी सदन में प्रमुखता से छाए रहे। प्रश्नकाल में पुरानी पेंशन योजना (OPS), लंबित भुगतान और नदियों की ड्रेजिंग को लेकर सवाल उठे। विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया गया।
सुक्खू का बड़ा ऐलान: पात्र कर्मचारियों को मिलेगा OPS का लाभ
पुरानी पेंशन योजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों को बड़ा भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी OPS के लिए पात्र हैं, उन्हें इसका लाभ जरूर मिलेगा। लंबित भुगतानों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को विरासत में गंभीर आर्थिक संकट मिला था, लेकिन मौजूदा सरकार कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के भुगतान को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु के सभी कर्मचारियों के बकाया भुगतान निपटा दिए गए हैं। उन्होंने केंद्र से अपेक्षित आपदा राशि और 1500 करोड़ रुपये की सहायता नहीं मिलने तथा राजस्व घाटा अनुदान बंद होने को अन्य भुगतान लंबित रहने की प्रमुख वजह बताया।
जयराम का सवाल- सरकार कर्मचारी हितैषी है तो धरने क्यों?
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कर्मचारी-पेंशनरों के धरने को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार कर्मचारी हितैषी है, तो कर्मचारी और पेंशनर आंदोलन करने को मजबूर क्यों हैं। साथ ही उन्होंने आपदा राहत राशि के इस्तेमाल और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के ओपीएस आंदोलन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
हिमाचल की नदियां बनेंगी कमाई का जरिया! ड्रेजिंग से आय बढ़ाने की तैयारी
ब्यास नदी समेत प्रदेश की अन्य नदियों और खड्डों में ड्रेजिंग के जरिए सरकार आय का नया रास्ता तलाश रही है। विधानसभा में उठे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कुल्लू की ब्यास नदी और बंजार विधानसभा क्षेत्र की सहायक खड्डों में ड्रेजिंग एवं माइनिंग को लेकर जरूरी अनुमतियां हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
उद्योग विभाग और माइनिंग विभाग से अनुमति मिलने के बाद अब केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नदियों से निकलने वाली ड्रेजिंग सामग्री का व्यवस्थित और वैज्ञानिक इस्तेमाल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। सरकार इसके लिए अलग विभाग बनाने पर भी मंथन कर रही है।
ड्रेजिंग से निकला 74 हजार मीट्रिक टन पत्थर, सरकार को मिली रॉयल्टी
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ड्रेजिंग के लिए FCA की मंजूरी की जरूरत नहीं है। कैबिनेट के निर्णय के बाद इस कार्य की जिम्मेदारी वन विभाग और वन निगम को दी गई है। अब तक करीब 74 हजार मीट्रिक टन सामग्री उठाई जा चुकी है, जिसकी रॉयल्टी सरकारी खजाने में जमा कराई गई है। सरकार ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री की नीलामी कर सकती है, जबकि ड्रेजिंग का पूरा खर्च संबंधित हाइड्रो पावर कंपनी को वहन करना होगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निकाली गई सामग्री का 100 प्रतिशत हिस्सा उपयोग योग्य नहीं होता।
ब्यास नदी से हटेगी सिल्ट और पत्थर? सरकार ने बताया क्या होगा फायदा
ब्यास नदी और इसकी सहायक खड्डों में जमा सिल्ट और पत्थरों को हटाने का मुद्दा विधानसभा में उठा। भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने कुल्लू और बंजार क्षेत्र में ड्रेजिंग एवं माइनिंग को लेकर सरकार से जानकारी मांगी। जवाब में उद्योग मंत्री ने बताया कि नदी से अतिरिक्त सामग्री हटाने से बाढ़ के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री की नीलामी से सरकार को राजस्व मिलने की संभावना भी है। हालांकि, सामग्री की गुणवत्ता और उसके उपयोग की सीमाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।



















