शिमला। राजवीर दीक्षित
(Elections in Himachal in 14 months; unfulfilled status of ‘guarantees’ becomes a cause for concern for the Sukhu government) हिमाचल विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ 14 महीने का वक्त बचा है और कांग्रेस सरकार के सामने सियासी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। नए मंत्रियों को लेकर चल रही कवायद के बीच नेताओं की अचानक दिल्ली दौड़ ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
प्रदेश की राजनीति में अब असली परीक्षा हाईकमान की है। सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधना और मिशन-2027 के लिए दोनों को एकजुट करना आसान नहीं होगा। उपमुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों का तीन दिन तक दिल्ली में डेरा और हाईकमान के साथ बैठकों ने साफ कर दिया है कि प्रदेश की सियासत में अंदरखाने कुछ बड़ा जरूर पक रहा है।
हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर प्रदेश नेतृत्व भले ही पर्दा डालता रहा हो, लेकिन दिल्ली की राजनीतिक हलचल ने अंदरूनी तस्वीर सामने ला दी है। सूत्रों के अनुसार, हाईकमान ने अलग-अलग नेताओं से बातचीत कर उनके बीच तालमेल और शक्ति संतुलन को लेकर रणनीति पर विचार किया। अब दिल्ली से आने वाला फैसला प्रदेश कांग्रेस की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
दिल्ली दौरा खत्म, मंत्री लौटे शिमला; राहुल गांधी से मुलाकात नहीं, फेरबदल पर चर्चाएं जारी
मंत्रिमंडल में विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच दिल्ली गए हिमाचल सरकार के मंत्री वापस शिमला पहुंच गए हैं। हर्षवर्धन चौहान और रोहित ठाकुर ने लौटते ही सचिवालय में अपने विभागों की बैठकें कीं। लंबित मामलों और महत्वपूर्ण फाइलों पर अधिकारियों से चर्चा की गई। हालांकि दिल्ली दौरे के दौरान राहुल गांधी से मुलाकात नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बनी हुई हैं।
मंत्रियों ने दिल्ली दौरे के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर प्रदेश के राजनीतिक हालात और अपने-अपने विभागों के कामकाज की जानकारी साझा की। इसके बाद मंत्रियों के दिल्ली दौरे को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार या कांग्रेस संगठन की ओर से अभी तक मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिमला में कहा कि वह दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से शिष्टाचार भेंट भी हुई।
दिल्ली दौरे से लौटे मंत्रियों के बाद अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत पर सबकी नजरें टिकी हैं। हाईकमान को सरकार के कामकाज और मंत्रियों की भूमिका को लेकर फीडबैक दिया गया है। ऐसे में अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस फीडबैक के आधार पर क्या राजनीतिक फैसला लेता है। मंत्रियों के प्रदर्शन, विभागों की स्थिति और सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल पर भी मंथन जारी है।
साढ़े तीन साल बाद सुक्खू सरकार से बड़ा सवाल—गारंटियों के अलावा क्या दिया?
अब सरकार के पास अपने काम का हिसाब देने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है। साढ़े तीन साल से अधिक के कार्यकाल के बाद जनता यह जानना चाहेगी कि चुनावी गारंटियों के अलावा सरकार ने प्रदेश के लिए क्या किया। अगले 14 महीने में विकास योजनाओं को गति देने और आर्थिक मोर्चे पर सरकार को कई कठिन फैसले लेने होंगे।
वेतन-पेंशन के बढ़ते बोझ के बीच विकास के लिए पैसा जुटाना बड़ी चुनौती है। साथ ही सरकार और संगठन के बीच जारी खींचतान मिशन-2027 की राह मुश्किल कर सकती है। चुनाव से पहले सरकार को अब वादों से आगे बढ़कर ठोस काम दिखाना होगा।
मंत्रियों की गैरमौजूदगी बनी वजह? हिमाचल कैबिनेट बैठक टली
हिमाचल प्रदेश में मानसून सत्र के बाद शुक्रवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित हो गई। आधिकारिक तौर पर बैठक टलने की वजह अपरिहार्य बताई गई है, लेकिन कई मंत्रियों के शिमला से बाहर होने की वजह से बैठक स्थगित होने की चर्चा है। अब सरकार जल्द ही बैठक की नई तारीख तय करेगी। उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान भी शुक्रवार को दिल्ली दौरे पर रहेंगे।
कैबिनेट विस्तार पर दिल्ली से नहीं मिली हरी झंडी, अब त्योहारों तक इंतजार
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी अटकने के साथ राहुल गांधी से मुलाकात भी टल गई है। ऐसे में नए मंत्रियों के नामों पर फैसला अब शारदीय नवरात्र या दीपावली तक खिंच सकता है।



















